केरल हाई कोर्ट ने मेडिकल कॉलेजों में परिसर में होने वाले उत्पीड़न के खिलाफ कार्रवाई की मांग की


कोच्चि, 1 जून (आईएएनएस)। केरल हाई कोर्ट ने कुछ मेडिकल कॉलेजों में व्याप्त संस्कृति की कड़ी निंदा की है। कोर्ट ने सोमवार को शिक्षकों द्वारा उत्पीड़न के आरोपों की जांच करने और छात्रों की सुरक्षा के लिए सुधारात्मक उपायों की सिफारिश करने के लिए एक उच्च स्तरीय समिति के गठन का सुझाव दिया।

ये टिप्पणियां हाल ही में एक छात्र की आत्महत्या से जुड़े मामले में आरोपी एक दंत चिकित्सा कॉलेज के प्रोफेसर द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान की गईं।

हालांकि, कोर्ट की टिप्पणियां व्यक्तिगत मामले के तथ्यों से कहीं आगे बढ़कर व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों के भीतर एक व्यापक और गंभीर समस्या को छू गईं।

जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने कहा कि यह मुद्दा इतना गंभीर हो गया है कि राज्य सरकार द्वारा व्यवस्थित जांच की आवश्यकता है।

जस्टिस ने कार्यवाही के दौरान टिप्पणी की कि केरल में मेडिकल कॉलेज छात्रों को बर्बाद कर रहे हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है। वे छात्रों, यहां तक ​​कि स्नातकोत्तर छात्रों के साथ भी बहुत क्रूरता से व्यवहार कर रहे हैं। कई शिकायतें हैं। यह एक बहुत ही गंभीर मामला है।

शैक्षणिक परिणामों के डर से कई छात्रों के चुप रहने पर चिंता व्यक्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि पीड़ित अक्सर निरंतर उत्पीड़न झेलने के बावजूद शिक्षकों या कॉलेज अधिकारियों को चुनौती देने से कतराते हैं।

न्यायाधीश ने सुझाव दिया कि छात्रों से गोपनीय प्रतिक्रिया प्राप्त करने, समस्या की सीमा का अध्ययन करने और उपचारात्मक उपायों की सिफारिश करने के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए।

कोर्ट ने संस्थागत व्यवहार के एक खतरनाक चक्र की ओर भी ध्यान दिलाया, जिसकी तुलना उसने ‘सास सिंड्रोम’ से की, एक ऐसी स्थिति जहां उत्पीड़न का शिकार हुए व्यक्ति अधिकार प्राप्त करने के बाद उसी तरह की प्रथाओं को दोहराते हैं।

ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब देश भर के व्यावसायिक कॉलेजों से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य, शैक्षणिक दबाव और शिक्षकों द्वारा कथित रूप से धमकाने की आशंकाओं के बारे में लगातार शिकायतें आ रही हैं।

इस साल की शुरुआत में कन्नूर में एक डेंटल कॉलेज के छात्र की मौत के बाद यह मुद्दा फिर से चर्चा में आया। इस घटना ने उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव, शैक्षणिक उत्पीड़न और जवाबदेही पर व्यापक बहस छेड़ दी।

छात्र संगठनों और शिक्षा कार्यकर्ताओं ने लंबे समय से मजबूत शिकायत निवारण तंत्र, स्वतंत्र शिकायत प्रणाली और व्यावसायिक कॉलेजों की बेहतर निगरानी की मांग की है।

–आईएएनएस

एमएस/


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