जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त


नई दिल्ली, 1 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है।

केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय (न्याय विभाग) द्वारा जारी अधिसूचना में कहा गया है, “भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 द्वारा प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए न्यायमूर्ति शील नागू के सर्वोच्च न्यायालय के जज के रूप में नियुक्ति के बाद न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है।”

गौरतलब है कि न्यायमूर्ति शील नागू की सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नति के परिणामस्वरूप पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय का प्रमुख पद रिक्त हो गया था। संवैधानिक योजना के तहत एक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति आवश्यक हो गई थी।पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय से स्थानांतरित होकर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा ने 21 जुलाई, 2025 को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में कार्यभार संभाला था। 16 नवंबर 1968 को जन्मे न्यायमूर्ति मिश्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से अर्थशास्त्र में बी.ए. (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त की और दिल्ली विश्वविद्यालय के कैंपस लॉ सेंटर से एलएलबी की उपाधि प्राप्त की।

उन्होंने 8 मई 1993 को अधिवक्ता के रूप में पंजीकरण कराया और मुख्य रूप से दीवानी, संवैधानिक और सेवा कानून के क्षेत्र में वकालत की। उन्होंने नोएडा, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, इलाहाबाद विकास प्राधिकरण, आईएफएफसीओ, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और उत्तर प्रदेश विद्युत निगम सहित कई वैधानिक और सार्वजनिक निकायों के लिए पैरवी की। उन्होंने महत्वपूर्ण मामलों में वरिष्ठ वकील के रूप में राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व भी किया।

न्यायमूर्ति मिश्रा को 2013 में वरिष्ठ अधिवक्ता नामित किया गया था। 3 फरवरी, 2014 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ ली और 1 फरवरी, 2016 को स्थायी न्यायाधीश बन गए। 20 जुलाई, 2025 तक इलाहाबाद उच्च न्यायालय में अपनी सेवाएं दीं, जिसके बाद उनका तबादला पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में हो गया।

जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की पीठ ने 2005-2006 के निठारी हत्याकांड मामले में दिया गया फैसला उल्लेखनीय है। पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में न्यायमूर्ति मिश्रा की पीठ ने अवैध खनन के खिलाफ कड़े आदेश जारी किए और सेवा एवं संवैधानिक मामलों में ऐतिहासिक फैसले दिए।

–आईएएनएस

ओपी/वीसी


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