कंबोडिया ने हासिल किया 95-95-95 एचआईवी लक्ष्य, 2030 तक एड्स उन्मूलन की राह पर

नोम पेन्ह, 30 मई (आईएएनएस)। कंबोडिया ने एचआईवी के खिलाफ बड़ी बाधा पार कर ली है। पिछले वर्ष एचआईवी उपचार के लिए निर्धारित 95-95-95 लक्ष्य हासिल कर लिया है और वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। यह जानकारी देश के स्वास्थ्य मंत्री चियांग रा ने दी।
इन लक्ष्यों का अर्थ है कि एचआईवी के साथ जी रहे 95 प्रतिशत लोगों को अपनी एचआईवी स्थिति की जानकारी हो। अपनी स्थिति जानने वाले 95 प्रतिशत लोग जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल (एआरटी) उपचार प्राप्त कर रहे हों। उपचार प्राप्त कर रहे 95 प्रतिशत लोगों में वायरस का स्तर इतना कम हो कि वह नियंत्रित (वायरली सप्रेस्ड) हो जाए।
एचआईवी वह वायरस है जो एड्स का कारण बनता है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार देर रात बयान जारी किया। जिसके अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री ने यह महत्वपूर्ण उपलब्धि शुक्रवार को नोम पेन्ह में कंबोडिया, लाओस और मलेशिया के लिए यूएनएड्स की कंट्री डायरेक्टर पैट्रिशिया ऑनपिन के साथ बैठक के दौरान साझा की।
च्हेंग रा ने कहा, “95-95-95 लक्ष्यों की प्राप्ति कंबोडिया के राष्ट्रीय एड्स कार्यक्रम की प्रगति और प्रभाव का स्पष्ट प्रमाण है।”
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि दर्शाती है कि कंबोडिया वर्ष 2030 तक एड्स को सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए खतरे के रूप में समाप्त करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
मंत्री ने यह भी कहा कि देश एचआईवी की रोकथाम, जांच और उपचार सेवाओं को स्वास्थ्य प्रणाली में और अधिक एकीकृत करेगा। साथ ही, प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (पीआरईपी) और स्व-परीक्षण (सेल्फ-टेस्टिंग) सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही एड्स कार्यक्रमों के लिए वित्तीय संसाधनों की स्थिरता बढ़ाई जाएगी।
सिंहुआ न्यूज एजेंसी के अनुसार, ओंगपिन ने एड्स के खिलाफ कंबोडिया की उल्लेखनीय प्रगति पर बधाई देते हुए कहा कि यूएनएड्स अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप 95-95-95 लक्ष्यों की उपलब्धि का औपचारिक सत्यापन और मान्यता देने की तैयारी करेगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, कंबोडिया में लगभग 76,000 लोग एचआईवी/एड्स के साथ जीवन जी रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वर्ष एड्स से संबंधित लगभग 700 मौतें और करीब 1,200 नए एचआईवी संक्रमण दर्ज किए गए।
एचआईवी एक ऐसा वायरस है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है। संक्रमण जब चरम अवस्था पर पहुंच जाता है तो उसे एड्स कहा जाता है।
यह वायरस शरीर की श्वेत रक्त कोशिकाओं (व्हाइट ब्लड सेल्स) को निशाना बनाता है, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है। इसके कारण व्यक्ति को तपेदिक (टीबी), विभिन्न संक्रमणों और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
एचआईवी संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों जैसे रक्त, स्तन दूध, वीर्य और योनि द्रव के माध्यम से फैलता है। यह किस करने, गले मिलने या भोजन साझा करने से नहीं फैलता। यह मां से शिशु में भी संक्रमित हो सकता है।
एचआईवी की रोकथाम और उपचार एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) के माध्यम से संभव है। यदि इसका उपचार न किया जाए, तो कई वर्षों बाद यह एड्स में बदल सकता है।
–आईएएनएस
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