राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालयों को दिया शोध और स्टार्टअप को बढ़ावा देने का निर्देश

लखनऊ, 15 मई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा है कि विश्वविद्यालयों को केवल शिक्षण संस्थान बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि उन्हें शोध, नवाचार और सामाजिक दायित्वों के जरिए आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने तकनीकी विश्वविद्यालयों में समसामयिक विषयों पर शोध को बढ़ावा देने, विश्वविद्यालयों द्वारा विकसित तकनीकों को समाजोपयोगी बनाने तथा ऊर्जा संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों के उपयोग पर ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में शुक्रवार को जन भवन में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के डीन और विभागाध्यक्षों ने शिक्षकों एवं कर्मचारियों के रिक्त पदों, छात्र प्रवेश, प्लेसमेंट, स्टार्टअप, शोध गतिविधियों, छात्रावास व्यवस्थाओं और खेल गतिविधियों समेत विभिन्न शैक्षणिक एवं प्रशासनिक पहलुओं की प्रस्तुति दी।
राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को और अधिक प्रोत्साहित करने पर बल देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ड्रोन तकनीक का अधिकतम लाभ किसानों तक पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि तकनीक आधारित नवाचार तभी सार्थक होंगे, जब उनका सीधा लाभ समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिले। उन्होंने खाद्य सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए किट विकसित करने अथवा उनके उपयोग को सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
छात्रावास व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों के साथ नियमित संवाद बनाए रखा जाए। विशेष रूप से बालिका छात्रावासों में स्वास्थ्य परीक्षण, स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
उन्होंने छात्रावासों में बाहर से भोजन मंगाने पर प्रभावी रोक लगाने और मादक पदार्थों के प्रवेश पर सख्ती से नियंत्रण रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को शुद्ध और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना आवश्यक है, क्योंकि स्वस्थ भोजन से सकारात्मक सोच और बेहतर व्यक्तित्व का विकास होता है।
राज्यपाल ने स्टार्टअप गतिविधियों में आने वाली बाधाओं के त्वरित समाधान तथा विभिन्न एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप विश्वविद्यालयों को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनने की दिशा में कार्य करना चाहिए।
उन्होंने इंजीनियरिंग एवं तकनीकी संस्थानों में बहुविषयक दृष्टिकोण विकसित करने और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों को पाठ्यक्रम में शामिल करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने विश्वविद्यालयों से बाल गृहों और वृद्धाश्रमों से जुड़कर सामाजिक सहभागिता बढ़ाने का आह्वान किया।
साथ ही सभी विश्वविद्यालयों में ‘मां-बेटी सम्मेलन’ आयोजित करने पर बल देते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने में सहायक होंगे। बैठक में प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशीष पटेल ने कहा कि राज्यपाल की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक विश्वविद्यालयों को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है और शासन स्तर से हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
— आईएएनएस
विकेटी/वीसी