भाजपा ने कर्नाटक सरकार पर बोला हमला, कहा-'लोग अपराधियों से ज्यादा सिस्टम से डरते हैं'


बेंगलुरु, 13 मई (आईएएनएस)। भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने बुधवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक में कानून-व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के नेतृत्व वाली सरकार में, जिन लोगों पर जनता की रक्षा की जिम्मेदारी थी, वे खुद ही भक्षक बन गए हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि लोग अपराधियों से ज्यादा सिस्टम से डरते हैं।

एक बयान में भाजपा नेता अशोक ने दावा किया कि कर्नाटक के लोग अब अपराधियों की तुलना में कानून लागू करने वाले सिस्टम से ज्यादा डरते हैं।

पुलिस विभाग से जुड़ी हालिया रिपोर्टों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये आंकड़े राज्य की कानून-व्यवस्था की स्थिति की एक चिंताजनक तस्वीर पेश करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के नेतृत्व में पुलिस विभाग ने अपना अनुशासन, नैतिकता और जनता का भरोसा खो दिया है और भ्रष्टाचार के दलदल में डूब गया है।

आंकड़ों का हवाला देते हुए अशोक ने कहा कि पिछले दो सालों में 713 पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया है। उनके अनुसार, यह किसी एक-दो अधिकारी के गलत आचरण को नहीं बल्कि विभाग के भीतर सिस्टम के पूरी तरह से ध्वस्त हो जाने को दर्शाता है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि 95 पुलिसकर्मियों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार लोग खुद ही गंभीर अपराधों में शामिल हों, तो नागरिक उन पर भरोसा कैसे कर सकते हैं। अशोक ने यह भी दावा किया कि लूट, चोरी और हत्या से जुड़े मामलों में पुलिसकर्मियों के नाम सामने आए हैं। अगर कानून लागू करने के लिए जिम्मेदार लोग ही बिना किसी डर के कानून का उल्लंघन करने लगें, तो राज्य में न्याय कैसे कायम रह सकता है।

बेंगलुरु की छवि पर चिंता जताते हुए, भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि निलंबित अधिकारियों में से ज्यादातर इसी शहर के थे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर भारत की टेक्नोलॉजी राजधानी में कानून-व्यवस्था इतनी बिगड़ गई, तो इससे बेंगलुरु की ब्रांड वैल्यू और साख को नुकसान पहुंचेगा।

नेता विपक्ष ने आगे दावा किया कि विभागीय जांचों में 400 से ज़्यादा पुलिस अधिकारी दोषी पाए गए हैं और उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार ने उनके खिलाफ क्या सख्त कार्रवाई की है। उनके अनुसार, लोगों में यह डर बढ़ रहा था कि जो लोग कथित तौर पर गुंडों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, नकली दस्तावेजों का नेटवर्क चला रहे हैं और बेकसूर लोगों को परेशान कर रहे हैं, वे बिना किसी कानूनी डर के काम कर रहे हैं।

इसे सिर्फ पुलिस विभाग की नाकामी नहीं बल्कि गृह विभाग का पूरी तरह से दिवालियापन बताते हुए, अशोक ने पूछा कि कांग्रेस सरकार की गारंटी योजनाओं के तहत लोगों की जान, माल और इज़्ज़त की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार अपराधियों पर लगाम कस रही है या उन्हें राजनीतिक संरक्षण दे रही है। अशोक ने सरकार से आग्रह किया कि वह तुरंत व्यवस्था को साफ करे और पुलिस विभाग लोगों का भरोसा बहाल करे और चेतावनी दी कि लोगों का गुस्सा आखिरकार सरकार को सत्ता से बेदखल कर सकता है।

उन्होंने कर्नाटक सरकार पर सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाया और सवाल उठाया कि क्या राज्य में सरकारी स्कूलों को बंद करने की कोई जानबूझकर कोशिश हो रही है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के बड़ी संख्या में खाली पद सिर्फ़ एक प्रशासनिक नाकामी को नहीं दिखाते बल्कि यह एक क्रूर लापरवाही है, जिसकी वजह से सार्वजनिक शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे ढह रही है।

नेता विपक्ष ने दावा किया कि पूरे कर्नाटक में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के 38,163 पद इस समय खाली हैं और कहा कि लगभग 22 प्रतिशत शिक्षण पद अभी भी भरे नहीं गए हैं। अगर हर पांच शिक्षण पदों में से एक पद खाली है, तो स्कूलों से ठीक से काम करने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि बिना शिक्षकों वाला स्कूल एक खाली इमारत से ज्यादा कुछ नहीं है और चेतावनी दी कि अगर यही स्थिति बनी रही, तो शिक्षा, गरीब बच्चों का भविष्य और सामाजिक समानता सभी को नुकसान पहुंचेगा।

–आईएएनएस

डीकेएम/पीएम


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