चंद्रबाबू नायडू, अश्विनी वैष्णव ने विशाखापत्तनम में गूगल क्लाउड एआई हब की नींव रखी

विशाखापत्तनम, 28 अप्रैल (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को गूगल क्लाउड इंडिया एआई हब की नींव रखी।
इस एआई हब में गूगल करीब 15 अरब डॉलर निवेश करेगा, जो कि देश के इतिहास में आया अब तक का सबसे बड़ी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) है।
भूमि पूजन समारोह में बोलते हुए चंद्रबाबू नायडू ने गूगल और परियोजना में उसके साझेदारों, अदाणीकनेक्स और एयरटेल नेक्सट्रा से सितंबर 2028 तक परियोजना को पूरा करके उद्घाटन करने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने परियोजना के शीघ्र पूरा होने के लिए राज्य सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया।
उन्होंने आगे कहा कि गूगल का यह निवेश विशाखापत्तनम के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए एक गेम चेंजर है।
उन्होंने याद करते हुए कहा कि 30 साल पहले, जब उन्होंने साइबराबाद को एक आईटी सिटी के रूप में स्थापित करने की नींव रखी थी, अब वह वेल्थ क्रिएशन का केंद्र बन गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एशिया का सबसे बड़ा डेटा सेंटर होगा और आंध्र प्रदेश देश के लिए एआई डेटा गेटवे के रूप में उभरेगा।
उन्होंने कहा, “गूगल, जिसने एक सर्च इंजन के रूप में शुरुआत की थी, अब भारत के विकास का इंजन बन रहा है। वैसे तो हर कोई गूगल पर सर्च करता है, लेकिन इस मामले में गूगल ने सर्च किया और आंध्र प्रदेश को चुना।”
नायडू ने कहा कि विशाखापत्तनम में सभी खूबियां मौजूद हैं और इसे इस मेगा प्रोजेक्ट के लिए सबसे उपयुक्त स्थान बताया। उन्होंने आश्वासन दिया कि यहां पानी की कोई कमी नहीं है और 60 दिनों के भीतर गोदावरी नदी से शहर में पानी लाने का वादा किया।
उन्होंने कहा कि सरकार अपने “शासन की गति” को बढ़ाने के लिए गूगल एआई डेटा सेंटर का उपयोग करेगी, जिसके लिए सरकार प्रतिबद्ध है।
संबोधन में बोलते हुए केंद्रीय मंत्री वैष्णव ने कहा कि एक देश के रूप में भारत कई तकनीकी विकास चक्रों से चूक गया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विजन है कि भारत नई तकनीकी विकास प्रक्रिया में अग्रणी भूमिका निभाए।
उन्होंने कहा कि 1990 के दशक और 2000 के शुरुआती वर्षों में की गई पहलों के बदौलत भारत आईटी सेवाओं का अग्रणी बन गया, लेकिन सेमीकंडक्टर, सर्वर, लैपटॉप और मोबाइल फोन के निर्माण में पिछड़ गया। हालांकि, मेक इन इंडिया पहल के शुभारंभ के साथ पिछले एक दशक में स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
उन्होंने कहा कि नगण्य इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण से आज मोबाइल फोन देश का सबसे अधिक निर्यात किया जाने वाला उत्पाद बन गया है, जिसने रत्न और आभूषण, वस्त्र और डीजल को भी पीछे छोड़ दिया है।
वैष्णव ने कहा कि प्रधानमंत्री का विजन भारत को विश्व का एक प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण केंद्र बनाना है। उन्होंने कहा, “आज की भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं भरी दुनिया में, विश्व एक ऐसे विश्वसनीय साझेदार की तलाश में है जहां आईटी अधिकारों की रक्षा की जाए और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का ध्यान रखा जाए। यह केवल भारत में ही संभव है।”
–आईएएनएस
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