करणी सिंह : भारत के पहले वर्ल्ड चैंपियनशिप पदक विजेता, 5 ओलंपिक में किया देश का प्रतिनिधित्व

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। कुछ खिलाड़ी ऐसे होते हैं, जो अपने प्रदर्शन से खेल को मशहूर बना देते हैं। भारत की धरती पर एक ऐसे ही खिलाड़ी ने साल 1924 में जन्म लिया था। यह खिलाड़ी कोई और नहीं, बल्कि भारतीय निशानेबाजी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाने वाले करणी सिंह थे।
करणी सिंह का जन्म राजस्थान के बीकानेर में हुआ था और वह महाराजा सादुल सिंह के बेटे और जनरल सर गंगा सिंह के पोते थे। करणी ने शौक के तौर पर निशानेबाजी शुरू की थी, लेकिन वह कब उनका जुनून बन गई यह पता नहीं चला। करणी ने क्ले पिजन ट्रैप और स्कीट निशानेबाजी में धीरे-धीरे महारत हासिल कर ली। हालांकि, उस दौर में भारत में निशानेबाजी को खेल के रूप में कोई खास मान्यता प्राप्त नहीं थी।
हालांकि, करणी सिंह के एक के बाद एक शानदार प्रदर्शन ने इस खेल को भारत में मशहूर कर दिया। वह भारत की ओर से विश्व चैंपियनशिप में पदक जीतने वाले पहले खिलाड़ी रहे। 1962 में हुई विश्व निशानेबाजी चैंपियनशिप में करणी ने ट्रैक स्पर्धा में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए ऐतिहासिक रजत पदक अपने नाम किया। यह इस प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक भी था। 1971 में इसी स्पर्धा में खेलते हुए करणी ने एशियाई निशानेबाजी चैंपियनशिप में भी स्वर्ण पदक पर निशाना लगाया, जबकि 1975 में उन्होंने महाद्वीपीय चैंपियनशिप में रजत पदक अपने नाम किया। 1974 के एशियाई खेलों में भी करणी सिंह रजत पदक जीतने में सफल रहे।
करणी सिंह ने अपने करियर में पांच बार ओलंपिक में हिस्सा लिया। करणी ने 1960, 1964, 1968, 1972 और 1980 में हुए ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया और वह यह मुकाम हासिल करने वाले पहले भारतीय भी बने। 1960 में हुए रोम ओलंपिक में करणी का प्रदर्शन शानदार रहा और उन्होंने टूर्नामेंट का अंत आठवें स्थान पर रहते हुए किया।
1982 में दिल्ली में हुए एशियाई खेलों में करणी सिंह उद्घाटन और समापन समारोह में भारत के ध्वजवाहक रहे। 1961 में करणी सिंह भारत की ओर से ‘अर्जुन पुरस्कार’ पाने वाले पहले निशानेबाज रहे। निशानेबाजी के खेल को भारत में मशहूर करने के लिए उनके नाम पर दिल्ली में डॉ. करणी सिंह शूटिंग रेंज स्थापित करके उन्हें सम्मानित भी किया गया। 64 साल की उम्र में करणी सिंह का निधन 6 सितंबर, 1988 को हुआ।
–आईएएनएस
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