गुलजार से मिली सीख को याद करते हुए बोले सुभाष घई, 'कविता मशीन नहीं, इंसान की आत्मा से जन्म लेती है'

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (आईएएनएस)। आज के समय में जहां तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं सच्ची कला और भावनाओं की अहमियत को लेकर चर्चा भी बढ़ रही है। इसी बीच दिग्गज फिल्ममेकर सुभाष घई के एक पोस्ट ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
सोमवार को सुभाष घई ने अपने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने महान गीतकार और शायर गुलजार के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने गुलजार की एक तस्वीर शेयर की, जिसमें वे पौधों की देखभाल करते नजर आ रहे हैं।
इस तस्वीर के साथ सुभाष घई ने लिखा, ”कविता किसी मशीन या तकनीक से नहीं बल्कि इंसान की आत्मा और सोच से जन्म लेती है।”
सुभाष घई ने कहा, ”मैंने यह सीख गुलजार साहब के साथ समय बिताकर हासिल की है। गुलजार की संगत ने मुझे यह समझने में मदद की कि कविता का असली मकसद इंसान की आत्मा को झकझोरना होता है। मैं उनको दिल से धन्यवाद देता हूं।”
सुभाष घई ने बताया कि अपने फिल्म स्कूल में उन्होंने कविता की क्लास शुरू करवाई ताकि छात्र सिर्फ तकनीकी ज्ञान तक सीमित न रहें, बल्कि अपनी सोच और भावनाओं को भी समझ सकें। उन्होंने कहा, ”जब तक कहानी में आत्मा और गहराई नहीं होगी, तब तक वह दर्शकों के दिल तक नहीं पहुंच सकती। यही कारण है कि गुलजार जी ने छात्रों को आध्यात्मिक और भावनात्मक रूप से मजबूत बनाने पर जोर दिया।”
अगर गुलजार के बारे में बात करें तो वे भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित और प्रसिद्ध गीतकारों में गिने जाते हैं। उन्होंने ‘आंधी’, ‘मासूम’, ‘इजाजत’, ‘दिल से’ और ‘स्लमडॉग मिलियनेयर’ जैसी फिल्मों के लिए कई यादगार गीत लिखे हैं। खास तौर पर ‘जय हो’ गाने के लिए उन्हें ऑस्कर अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था। छह दशकों से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने अपनी लेखनी से लाखों लोगों के दिलों को छुआ है।
वहीं सुभाष घई हिंदी सिनेमा के उन निर्देशकों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी फिल्मों से दर्शकों का दिल जीता। उन्होंने 1976 में ‘कालीचरण’ से अपने निर्देशन करियर की शुरुआत की थी और इसके बाद ‘कर्ज’, ‘हीरो’, ‘कर्मा’, ‘राम लखन’, ‘सौदागर’, ‘खलनायक’, ‘परदेस’ और ‘ताल’ जैसी कई सुपरहिट फिल्में दीं।
–आईएएनएस
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