मध्य प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाने के लिए शिवराज सिंह चौहान ने जिला कृषि रोडमैप लॉन्च किया


नई दिल्ली, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को मध्य प्रदेश के चार जिलों (सीहोर, रायसेन, विदिशा और देवास) के लिए जिला-स्तरीय कृषि रोडमैप का पहला सेट जारी किया। इसका उद्देश्य खेती को अधिक लाभदायक बनाना, साथ ही टिकाऊ तरीकों और संसाधनों के कुशल उपयोग को बढ़ावा देना है।

रायसेन जिले में चल रहे तीन-दिवसीय ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ के दूसरे दिन ये रोडमैप जारी किए गए। इस कार्यक्रम में किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों और कृषि उपकरण, बीज तथा अन्य सामग्री का कारोबार करने वाली कंपनियों सहित विभिन्न हितधारक एक मंच पर एकत्रित हुए।

शिवराज सिंह चौहान ने सभा को संबोधित करते हुए इस बात पर जोर दिया कि अब केवल कृषि उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, स्थानीय कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल ‘सही फसलों’ को अपनाने की दिशा में बदलाव लाने की आवश्यकता है। उन्होंने किसानों से गेहूं, धान और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलों से आगे बढ़कर, पशुपालन, बागवानी, मधुमक्खी पालन और जैविक खेती जैसी सहायक गतिविधियों के माध्यम से विविधीकरण अपनाने का आग्रह किया, ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।

जिला-विशिष्ट योजनाओं में जल के कुशल उपयोग, फसल विविधीकरण, जलवायु-अनुकूल कृषि और बेहतर बाजार संपर्कों पर विशेष जोर दिया गया है। इन क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में भूजल स्तर में गिरावट एक बढ़ती हुई चिंता के रूप में सामने आ रही है, जिसे देखते हुए इस रोडमैप में जल संरक्षण और उपलब्ध संसाधनों के सर्वोत्तम उपयोग को प्राथमिकता दी गई है।

कृषि मंत्री ने टमाटर, प्याज, लहसुन और शिमला मिर्च जैसी फसलों के साथ-साथ अनार जैसे फलों की ओर भी संकेत किया। उन्होंने किसानों को ड्रैगन फ्रूट और एवोकैडो की खेती जैसे नए विकल्पों को आजमाने के लिए भी प्रोत्साहित किया। इस पहल की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसके अंतर्गत ब्लॉक स्तर पर ‘बीज ग्राम’ विकसित किए जाएंगे, ताकि किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले बीज आसानी से उपलब्ध हो सकें।

शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रत्येक ब्लॉक में ऐसे लगभग 10 गांव स्थापित करने से कृषि उत्पादकता में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हो सकती है। इस कार्यक्रम को केंद्र और राज्य सरकारों की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सहायता प्रदान की जाएगी, जिसमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की ओर से तकनीकी सहयोग भी उपलब्ध कराया जाएगा।

–आईएएनएस

एसडी/डीकेपी


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