कोलकाता एयर कार्गो तस्करी घोटाले में ईडी का बड़ा एक्शन, निलंबित कस्टम्स अधिकारी की 48.61 लाख रुपए की संपत्ति कुर्क

कोलकाता, 9 अप्रैल (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), कोलकाता जोनल ऑफिस ने एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स, कोलकाता के माध्यम से बड़े पैमाने पर सामान की तस्करी के मामले में सख्त कार्रवाई की है।
ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत पूर्व डिप्टी कमिश्नर नवनीत कुमार की 48.61 लाख रुपए की अचल संपत्ति पर प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी कर कुर्क कर लिया है। नवनीत कुमार उस समय कोलकाता एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात थे और फिलहाल निलंबित हैं।
ईडी की इस कार्रवाई की आधारभूत वजह सीबीआई, एसीबी, कोलकाता द्वारा नवनीत कुमार और अन्य के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर है। यह एफआईआर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), 1860 की विभिन्न धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज की गई थी। मामला एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में संगठित तस्करी, गलत घोषणा वाली खेपों की अवैध निकासी और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाने से जुड़ा है।
जांच के दौरान सीबीआई, एसीबी, पटना ने नवनीत कुमार के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की। यह एफआईआर उनके फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्रों, जन्मतिथि प्रमाण पत्र और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) सिविल सेवा परीक्षा में बैठने के लिए डिग्री में हेराफेरी से संबंधित है।
जांच में खुलासा हुआ कि 5 जून 2017 को एयर कार्गो कॉम्प्लेक्स में डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) की अचानक जांच के दौरान 19 खेपें जब्त की गईं। ये खेपें पूरी तरह गलत घोषित पाई गईं। डीआरआई द्वारा मूल्यांकन के बाद जब्त सामानों की असली कीमत लगभग 194 करोड़ रुपए बताई गई, जबकि घोषित मूल्य मात्र 44.54 लाख रुपए था।
19 बिल ऑफ एंट्री में जिन सामानों का जिक्र था, वे वास्तव में जब्त खेपों में मौजूद सामानों से पूरी तरह अलग थे। तस्कर बिचौलियों के जरिए नवनीत कुमार को पहले ही संवेदनशील जानकारी पहुंचा देते थे। इसके बाद नवनीत कुमार अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश देते थे कि वे केवल उन पैकेजों की चुनिंदा जांच करें जो घोषित विवरण से मेल खाते हों। वे जानबूझकर उन खेपों की जांच से बचते थे जिनमें गलत घोषित या प्रतिबंधित सामान होता था।
निर्धारित ईडीआई/सीबीईसी दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए, बिना सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के और ईडीआई सिस्टम में किसी तकनीकी खराबी के बावजूद ‘मैनुअल आउट ऑफ चार्ज’ आदेश जारी कर उच्च मूल्य वाले कंसाइनमेंट को धोखाधड़ी से क्लियर कराया गया। जांच में एक सुनियोजित नेटवर्क का भी पता चला जिसमें कस्टम ब्रोकर संस्थाएं, जी-कार्ड धारक और निजी व्यक्ति शामिल थे। ये सभी अवैध लाभ के बदले दस्तावेजीकरण, जांच और क्लियरेंस प्रक्रिया में तालमेल बिठाते थे।
ईडी की जांच में यह साफ हुआ कि नवनीत कुमार ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए अधीनस्थों के साथ मिलीभगत की और तस्करी की इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाई।
–आईएएनएस
एससीएच