दिलीप वेंगसरकर: लॉर्ड्स मैदान के बादशाह, लाला अमरनाथ ने दिया था 'कर्नल' नाम


नई दिल्ली, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। दिलीप वेंगसरकर भारत के उन बल्लेबाजों में से एक रहे, जिन्हें विदेशी धरती पर खेलना हमेशा ही खूब रास आया। वेंगसरकर क्रिकेट का मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स के मैदान पर लगातार तीन शतक लगाने वाले पहले विदेशी बल्लेबाज रहे। उन्होंने अपने करियर में कई बड़े मुकाम हासिल किए।

दिलीप वेंगसरकर का जन्म 6 अप्रैल 1956 को महाराष्ट्र के राजापुर में हुआ। दिलीप को शुरुआत से ही क्रिकेट के खेल में खास रुचि थी, और जल्द ही उन्होंने इस खेल में अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया। छोटी सी उम्र में ही दिलीप एक के बाद एक कई बड़ी उपलब्धियां हासिल करते चले गए। 19 साल की उम्र में दिलीप जब ईरानी ट्रॉफी में रेस्ट ऑफ इंडिया की ओर से खेल रहे थे, तो उनकी बल्लेबाजी से लाला अमरनाथ काफी प्रभावित हुए। दिलीप की बल्लेबाजी को देखते हुए रेडियो कमेंट्री में अमरनाथ ने कहा था कि वह कर्नल सीके नायडू की तरह खेल रहे हैं, और यहीं से उनका नाम ‘कर्नल’ पड़ गया। इस मुकाबले में दिलीप वेंगसरकर ने मदन लाल, बिशन सिंह बेदी, और इरापल्ली जैसे गेंदबाजों को क्रीज से बाहर निकलकर बड़े-बड़े शॉट्स लगाए थे।

ईरानी कप में किए गए दमदार प्रदर्शन से ही दिलीप वेंगसरकर की किस्मत चमक उठी, और एक साल के अंदर ही उन्हें भारतीय टीम में चुन लिया गया। 24 जनवरी को न्यूजीलैंड की धरती पर दिलीप वेंगसरकर ने अपने इंटरनेशनल करियर का पहला टेस्ट मुकाबला खेला। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। दिलीप अपनी शानदार बल्लेबाजी के दम पर जल्द ही भारतीय टीम के अहम बल्लेबाज बन गए। विदेशी पिचों पर दिलीप को खेलना काफी पसंद था, खासतौर पर लॉर्ड्स के मैदान पर उनका रिकॉर्ड कमाल का रहा। वह लॉर्ड्स में लगातार तीन शतक लगाने वाले पहले विदेशी बल्लेबाज रहे।

लॉर्ड्स में खेले 4 टेस्ट मुकाबलों में दिलीप ने 72 की दमदार औसत से 508 रन बनाए। सिर्फ इंग्लैंड ही नहीं, बल्कि वेस्टइंडीज के मजबूत गेंदबाजी अटैक के खिलाफ भी दिलीप ने शतक लगाया और पाकिस्तान, श्रीलंका जैसी टीमों के खिलाफ भी उनका रिकॉर्ड कमाल का रहा। दिलीप ने अपने टेस्ट करियर में कुल 116 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 185 पारियों में 42 की औसत से खेलते हुए 6,868 रन बनाए। दिलीप ने कुल 17 शतक और 35 अर्धशतक लगाए। उन्होंने अपना वनडे डेब्यू साल 1976 में न्यूजीलैंड के खिलाफ ही किया। 50 ओवर के फॉर्मेट में उन्होंने कुल 129 मुकाबले खेले और 34 की औसत से 3,508 रन बनाए।

दिलीप वेंगसरकर 1983 में वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रहे। हालांकि, वह टूर्नामेंट के सभी मुकाबले नहीं खेल सके। वेस्टइंडीज के खिलाफ खेले गए मुकाबले में दिलीप मैल्कम मार्शल की एक बाउंसर पर बुरी तरह से चोटिल हो गए थे। मार्शल की बाउंसर से दिलीप का जबड़ा टूट गया था। 1987 में दिलीप को कपिल देव के बाद भारतीय टीम की कप्तानी भी सौंपी गई। हालांकि, बतौर कप्तान उनका रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा, जिसके बाद यह जिम्मेदारी उनसे जल्द ही वापस ले ली गई। उन्होंने 18 वनडे और 10 टेस्ट मैचों में टीम की कप्तानी की। दिलीप को साल 1981 में अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। वहीं, 1987 में उन्हें पद्म श्री से भी नवाजा गया। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने उन्हें कर्नल नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड से भी नवाजा।

–आईएएनएस

एसएम/डीकेपी


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