नेपाल ने बदले ट्रैक‍िंग के न‍ियम, यात्रा के ल‍िए अब साथी ढूंढने की जरूरत नहीं


काठमांडू, 23 मार्च (आईएएनएस)। नेपाल ने विदेशी ट्रैकर्स को कुछ खास प्रतिबंधित इलाकों में अकेले जाने की अनुमति देने का फैसला किया है। इस फैसले के साथ ही वह मौजूदा पर‍म‍िट स‍िस्‍टम खत्‍म हो गया, ज‍िसके तहत पहले सिर्फ ग्रुप में आने वाले लोगों को ही इन इलाकों में जाने की अनुमति मिलती थी।

नेपाल ने चीन सीमा से सटे 13 पर्वतीय जिलों में 15 क्षेत्रों को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया है। इन इलाकों में विदेशी नागरिकों को बिना विशेष परमिट और शुल्क के यात्रा करने की अनुमति नहीं थी। इन क्षेत्रों में अपर मुस्तांग, तापलेजुंग, संखुवासभा, सोलुखुम्बु, दोलखा, रसुवा, गोरखा के दो क्षेत्र, मनांग, डोल्पा के दो क्षेत्र, मुगु, हुम्ला, बाजहांग और दार्चुला शामिल हैं।

इमिग्रेशन डिपार्टमेंट ने सोमवार को जारी एक नोटिस में बताया कि अब कुछ शर्तों के साथ अकेले यात्री को भी ट्रेकिंग परमिट जारी किया जाएगा। यात्र‍ी को आवेदन किसी एजेंसी के माध्यम से करना होगा। एक ट्रेकिंग गाइड अनिवार्य रूप से साथ होगा। संबंधित एजेंसी को आपातकालीन स्थिति में रेस्क्यू (बचाव) की पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी और अन्य कानूनी प्रावधानों का पालन करना होगा।

विभाग के अनुसार, यह निर्णय ट्रेकिंग एजेंसियों के संगठन और अन्य पर्यटन से जुड़े संगठनों की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।

इससे पहले, विभाग इन इलाकों में आने वाले सिर्फ ग्रुप यात्रियों को ही ट्रेकिंग परमिट जारी करता था। नतीजतन, जो लोग अकेले ट्रेकिंग करना चाहते थे, उन्हें अपने लिए साथी ढूंढने पड़ते थे, जिससे उन्हें काफी परेशानी होती थी। पर्यटन से जुड़े कारोबारियों ने भी शिकायत की थी कि इस नीति का पर्यटन को बढ़ावा देने के प्रयासों पर बुरा असर पड़ रहा है।

विभाग ने यह भी तय किया है कि इन क्षेत्रों में हर सात ट्रेकर्स पर कम से कम एक गाइड अनिवार्य होगा। बड़े समूह को एक गाइड के साथ संभालना कठिन होता है, इसलिए अब एक गाइड के साथ अधिकतम सात ट्रेकर्स ही जा सकेंगे।

इसके अलावा, पहले विदेशी नागरिकों को ट्रैकिंग परमिट के लिए आवेदन करते समय स्वीकृत नेपाल वीजा नंबर दर्ज करना आवश्यक था। अब इसमें बदलाव करते हुए विदेश से आवेदन करने वाले लोग अपने वीजा आवेदन नंबर (सबमिशन आईडी) का उपयोग कर सकेंगे।

विभाग का कहना है कि इन नए प्रावधानों से नेपाल में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और ट्रेकर्स की व्यक्तिगत सुरक्षा भी बेहतर होगी।

–आईएएनएस

एवाई/डीकेपी


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