ऑस्ट्रेलिया के लिए कभी भी खेलना खास, लेकिन टेस्ट टीम में वापसी मेरी प्राथमिकता है: रेनशॉ


गोल्ड कोस्ट, 23 मार्च (आईएएनएस)। मैथ्यू रेनशॉ ने ऑस्ट्रेलिया के टी20 वर्ल्ड कप अभियान में अपनी शानदार बल्लेबाजी के साथ सभी को प्रभावित किया है। रेनशॉ का कहना है कि लिमिटेड-ओवर्स फॉर्मेट में अपने करियर का सबसे बेहतरीन साल बिताने के बावजूद, टेस्ट टीम में वापसी करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

मैथ्यू रेनशॉ ने नवंबर 2016 में टेस्ट डेब्यू किया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में वनडे और फिर जनवरी 2026 में टी20 फॉर्मेट में डेब्यू किया। इसी के साथ रेनशॉ ऑस्ट्रेलिया के लिए तीनों फॉर्मेट खेलने वाले 63वें खिलाड़ी बने। ‘बैगी ग्रीन’ (टेस्ट कैप) में उनका आखिरी मैच 2023 में ऑस्ट्रेलिया के भारत दौरे के दौरान आया था।

रेनशॉ को उम्मीद है कि शेफील्ड शील्ड सीजन में शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें रेड-बॉल टीम में जगह मिल सकती है। इस सीजन में उन्होंने 49.90 की औसत से सर्वाधिक 499 रन बनाए, जिसमें तीन शतक भी शामिल हैं।

हालांकि, उस्मान ख्वाजा के रिटायरमेंट के बाद मिडिल ऑर्डर में एक जगह खाली हुई है और जेक वेदरल्ड के अभी तक ओपनिंग की भूमिका पक्की न कर पाने के कारण, वह प्लेइंग इलेवन में जगह बनाने की दौड़ में शामिल हैं।

मैथ्यू रेनशॉ ने ऑस्ट्रेलिया के 2026-27 के शेड्यूल की घोषणा के मौके पर पत्रकारों से कहा, “जब मैं प्री-सीजन में अपने लक्ष्यों के बारे में सोच रहा था, तो मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं दो अलग-अलग फॉर्मेट में डेब्यू करूंगा। अब जब मुझे थोड़ा ब्रेक मिला है, तो मैं इस बारे में सोचकर खुश हो सकता हूं और देख सकता हूं कि वह साल कितना सफल रहा। टेस्ट टीम में वापसी की कोशिश करना मेरी प्राथमिकता है, लेकिन ऑस्ट्रेलिया के लिए कभी भी खेलना बहुत खास होता है। अब टी20 वर्ल्ड कप में खेलना तो और भी शानदार अनुभव रहा।”

29 वर्षीय खिलाड़ी ने इसी साल की शुरुआत में पाकिस्तान में अपना टी20 डेब्यू किया था। उन्होंने टी20 वर्ल्ड कप 2026 में आयरलैंड के खिलाफ 37 रन और जिम्बाब्वे के खिलाफ 65 रन बनाए थे। इस टूर्नामेंट में उन्होंने सिर्फ दो पारियों में बल्लेबाजी करते हुए ऑस्ट्रेलिया के लिए तीसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी का दर्जा हासिल किया।

रेनशॉ ने कहा, “खासतौर पर मेरे वनडे क्रिकेट में, मैं खेल को थोड़ा और अपने हिसाब से ढाल पाता हूं। हम दुनिया भर में यह थोड़ा ज्यादा देख रहे हैं कि गेंदबाजों के गेंदबाजी करने के तरीके को बदलने की कोशिश की जा रही है। पहले रेड-बॉल क्रिकेट में, जब गेंदबाज ऑफ-स्टंप के ऊपरी हिस्से पर गेंद डालते थे, तो आपको गेंद को जितना हो सके छोड़ना पड़ता था। लेकिन अब, विकेट पर थोड़ा आगे बढ़कर खेलने से गेंदबाजी का एंगल बदल जाता है और गेंदबाज सोचने पर मजबूर हो जाता है कि आप क्या करने की कोशिश कर रहे हैं।”

ऑस्ट्रेलिया की सफ़ेद गेंद वाली टीम मई के आखिर और जून की शुरुआत में पाकिस्तान और बांग्लादेश के खिलाफ वनडे और टी20 दौरों के साथ वापसी करेगी, जबकि टेस्ट टीम अगस्त में एक्शन में दिखेगी।

–आईएएनएस

आरएसजी


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