सिनेमा जगत के लिए बेहद खास बिहार, मनोरंजन को ऐसे प्रोत्साहित कर रही सरकार

पटना, 22 मार्च (आईएएनएस)। बिहार भारत का एक खूबसूरत और ऐतिहासिक राज्य है। यहां गंगा की पावन धरा, मौर्य साम्राज्य, पहले लोकतंत्र वैशाली और प्राचीन नालंदा-विक्रमशिला की विरासत, बोधगया का महाबोधि मंदिर, राजगीर से जुड़े महाभारतकालीन इतिहास और मधुबनी पेंटिंग्स की जीवंत कला है। बिहार की मिट्टी उपजाऊ और संस्कृति समृद्ध है। यह राज्य आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक धरोहर के अनमोल संगम के साथ ही सिनेमा जगत के लिए भी बेहद खास है।
22 मार्च को बिहार दिवस है, जो राज्य के गठन और उसकी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को याद करने का अवसर है। कई फिल्मों और टीवी शोज के साथ ही वेब सीरीज की शूटिंग भी बिहार में हो चुकी है। बिहार सरकार फिल्म इंडस्ट्री को बिहार फिल्म प्रोत्साहन नीति के साथ प्रोत्साहन भी दे रही है। यह साल 2024 में लागू किया गया, जिसका मकसद राज्य में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देना, रोजगार सृजन करना और पर्यटन को प्रोत्साहित करना है। यह नीति भारतीय सिनेमा की आर्थिक ताकत को देखते हुए बनाई गई है, जहां साल 2023 में फिल्म इंडस्ट्री ने 12,226 करोड़ रुपए का राजस्व कमाया।
बिहार ने सिनेमा को कई शानदार एक्टर दिए हैं और अब राज्य खुद फिल्म हब बनने की राह पर है। नीति के तहत राज्य में फिल्म, टीवी सीरियल्स, वेब सीरीज और डॉक्यूमेंट्री शूटिंग करने वाले निर्माताओं को आर्थिक प्रोत्साहन के लिए सरकार कदम उठा रही है। कला, संस्कृति व युवा विभाग भी है और बिहार राज्य फिल्म विकास एवं वित्त निगम इसकी नोडल एजेंसी है। सिंगल विंडो पोर्टल के जरिए अनुमति, सब्सिडी और अन्य सुविधाएं मिलती हैं। विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली सशक्त समिति नीति के स्पष्टीकरण, विवाद समाधान और अनुदान की सिफारिश भी करती है। प्रमुख प्रोत्साहन फीचर फिल्मों के लिए कुल लागत का 25 प्रतिशत तक अनुदान (अधिकतम 2-3 करोड़ तक), शूटिंग के दिनों के आधार पर तय होते हैं।
राज्य में 75 प्रतिशत से ज्यादा शूटिंग पर अतिरिक्त 50 लाख तक, राज्यकेंद्रित कहानी वाली फिल्मों के लिए 50 प्रतिशत या 2 करोड़ तक विशेष अनुदान, स्थानीय कलाकारों को मौका देने पर 10 से 25 लाख अतिरिक्त दिया जाता है। साथ ही भोजपुरी, मैथिली और मगही जैसी क्षेत्रीय भाषा फिल्मों के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान, जबकि हिंदी-अंग्रेजी के लिए 25 प्रतिशत तक अनुदान है।
टीवी सीरियल के लिए 50 लाख से 1 करोड़ रुपए तक, ओटीटी वेब सीरीज के लिए 2 से 3 करोड़ तक और डॉक्यूमेंट्री के लिए 30 से 40 लाख तक अनुदान का प्रावधान है, जो पर्यटन, विरासत, संस्कृति पर फोकस वाली हो। सभी अनुदान सेंसर बोर्ड के सर्टिफिकेट और रिलीज के बाद मिलते हैं।
बिहार की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक स्थल और सांस्कृतिक धरोहर अब फिल्ममेकर्स को आकर्षित कर रही हैं। प्रमुख लोकेशन में पटना का गोलघर, गंगा जेपी पाथ (मरीन ड्राइव जैसा रिवरसाइड रोड), महावीर मंदिर, राजगीर का घोड़ा कटोरा झील, विश्व शांति स्तूप, नालंदा, बोधगया, गया, जहानाबाद समेत वैशाली, पावापुरी, रोहतासगढ़ किला, वाल्मीकि टाइगर रिजर्व जैसी जगहें शामिल हैं।
ये जगहें बॉलीवुड, भोजपुरी और वेब सीरीज के लिए इस्तेमाल हो रही हैं। नीति से राज्य में फिल्म सिटी, स्किल डेवलपमेंट और पर्यटन को बढ़ावा मिल रहा है।
–आईएएनएस
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