मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत का रुख अमेरिका की ओर, एलपीजी आपूर्ति में बड़ा बदलाव


नई दिल्ली, 20 मार्च (आईएएनएस)। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के चलते वैश्विक आपूर्ति बाधित होने के बीच भारत अब एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति के लिए अमेरिका की ओर तेजी से रुख कर रहा है। एक नई रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है।

एस एंड पी ग्लोबल की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए अमेरिका से एलपीजी की आपूर्ति बढ़कर पारंपरिक खाड़ी देशों से आने वाली मात्रा को पार कर गई है।

रिपोर्ट में बताया गया कि 19 मार्च 2026 को समाप्त सप्ताह में भारत का कुल साप्ताहिक एलपीजी आयात घटकर 2.65 लाख मीट्रिक टन रह गया, जो 5 मार्च को समाप्त सप्ताह में 3.22 लाख मीट्रिक टन था।

रिपोर्ट के मुताबिक, “रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर चिंताओं के बीच भारत अपने एलपीजी आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रहा है, जिसमें अमेरिका से आयात भी शामिल है।”

युद्ध से पहले भारत की कुल एलपीजी खपत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा खाड़ी क्षेत्र से आता था। हालांकि, 19 मार्च तक के सप्ताह में मध्य पूर्व से आयात घटकर केवल 89,000 मीट्रिक टन रह गया, जो कुल आयात का 34 प्रतिशत है, यह जनवरी के बाद सबसे कम स्तर है।

वहीं, वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़कर 1.76 लाख मीट्रिक टन पहुंच गई, जबकि इससे पहले वाले सप्ताह में मध्य पूर्व से ही 100 प्रतिशत आयात हो रहा था।

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर एलपीजी की कमी को लेकर लंबी कतारों और देरी की खबरें सामने आईं, जिससे लोगों में चिंता बढ़ी। हालांकि, एक स्वतंत्र विश्लेषण के अनुसार भारत की ऊर्जा व्यवस्था अब पहले से ज्यादा मजबूत और लचीली हो चुकी है, जो बाहरी झटकों को संभालने में सक्षम है।

सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेल विपणन कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्बाध आपूर्ति बनाए रखें। वहीं, होटल और रेस्टोरेंट जैसे व्यावसायिक क्षेत्रों में अस्थायी रूप से आपूर्ति प्रबंधन किया गया।

इसके अलावा, बाजार में घबराहट से बचने के लिए नियामक उपाय भी लागू किए गए।

ऑपरेशन संकल्प के तहत भारतीय नौसेना ने संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की। साथ ही, कूटनीतिक प्रयासों के जरिए एलपीजी टैंकरों को बाधित मार्गों से निकालकर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचाया गया, जिससे आपूर्ति संबंधी चिंताएं काफी हद तक कम हुई हैं।

–आईएएनएस

डीएससी


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