पश्चिम बंगाल: हुगली-हावड़ा के शहरी-कृषि मिश्रित श्रीरामपुर क्षेत्र में सात विधानसभा सीटें, टीएमसी की मजबूत पकड़ को भाजपा की चुनौती


नई दिल्ली, 15 मार्च (आईएएनएस)। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा कर दी है। इस बार प्रदेश में मात्र दो चरणों (23 अप्रैल और 29 अप्रैल) में मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को सामने आएंगे। तारीखों की घोषणा के साथ ही पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा के बीच 1-1 विधानसभा के लिए खींचतान देखने को मिल रही है।

श्रीरामपुर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र भारत के 543 संसदीय क्षेत्रों में से एक महत्वपूर्ण सीट है, जो पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित है। पहले इसे सेरामपुर-26 के नाम से जाना जाता था, लेकिन 2009 के परिसीमन के बाद इसका नाम बदलकर श्रीरामपुर-27 कर दिया गया। यह क्षेत्र मुख्य रूप से हुगली जिले और हावड़ा जिले के हिस्सों को कवर करता है। इस लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें चंडीतला, डोमजूर, जगतबल्लभपुर, जंगीपाड़ा, श्रीरामपुर, उत्तरपाड़ा और चंपदानी शामिल हैं, जिनमें से पांच विधानसभा क्षेत्र हुगली जिले में और दो हावड़ा जिले में आते हैं।

श्रीरामपुर उप-मंडल हुगली जिले का सबसे अधिक शहरीकृत और जनसंख्या घनत्व वाला हिस्सा है। शहरीकरण की शुरुआत हुगली फ्लैट्स के औद्योगीकरण से हुई, जो हुगली नदी के किनारे एक संकरी पट्टी है। यह शहरी विस्तार अंदरूनी इलाकों में फैलकर हुगली-दामोदर मैदान तक पहुंच गया, जो हुगली और दामोदर नदियों के बीच का कृषि-समृद्ध जलोढ़ मैदान है। पूरा क्षेत्र गंगा डेल्टा का हिस्सा है। हुगली एक ज्वारीय नदी है और इसका पश्चिमी किनारा काफी ऊंचा है। शहरीकरण के कारण यहां की आजीविका में बड़ा बदलाव आया है। अब अधिकांश लोग गैर-कृषि कार्यों जैसे उद्योग, सेवा और व्यापार में लगे हैं।

हुगली जिला कुल मिलाकर कृषि-समृद्ध है। जिले की अर्थव्यवस्था में कृषि अभी भी प्रमुख भूमिका निभाती है, खासकर ग्रामीण इलाकों में। जिले की कुल आय का एक-तिहाई हिस्सा कृषि से आता है। हालांकि, श्रीरामपुर उप-मंडल में शहरीकरण के कारण कृषि का महत्व कम हो रहा है। उप-मंडल में 7 पुलिस स्टेशन, 4 सामुदायिक विकास खंड, 4 पंचायत समितियां, 34 ग्राम पंचायतें, 240 मौजा, 208 बसे हुए गांव, 6 नगर पालिकाएं और 34 जनगणना शहर शामिल हैं। उप-मंडल का मुख्यालय श्रीरामपुर शहर में है।

2011 की जनगणना के अनुसार श्रीरामपुर लोकसभा क्षेत्र की कुल आबादी लगभग 24.20 लाख थी, जिसमें 24.34 प्रतिशत ग्रामीण और 75.66 प्रतिशत शहरी थी। अनुसूचित जाति की आबादी 14.43 प्रतिशत और अनुसूचित जनजाति की 0.9 प्रतिशत थी।

अगर राजनीतिक परिदृश्य की बात करें तो 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के कल्याण बनर्जी ने 6,73,970 वोटों से जीत हासिल की, जबकि भाजपा के कबीर शंकर बोस को 4,99,140 वोट मिले। जीत का अंतर 1,74,830 वोटों का रहा। इससे पहले 2019 में कल्याण बनर्जी ने 6,37,707 वोटों से जीत दर्ज की थी, जबकि भाजपा के देबजीत सरकार को 5,39,171 वोट मिले थे। 2014 में भी टीएमसी ने कब्जा बनाए रखा था, जहां कल्याण बनर्जी को 5,14,933 वोट मिले और सीपीएम के तीर्थंकर रे को 3,62,407 वोट।

यह क्षेत्र टीएमसी का गढ़ माना जाता है। 1998 में ही यहां टीएमसी उम्मीदवार ने जीत हासिल की थी। 2004 में टीएमसी दूसरे स्थान पर रही, लेकिन 2009 में कल्याण बनर्जी ने सीपीएम से सीट छीन ली। तब से टीएमसी यहां मजबूत है। क्षेत्र में त्रिकोणीय मुकाबला देखा गया है, जहां टीएमसी, भाजपा और वाम दल मुख्य प्रतिस्पर्धी रहे हैं। 2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के मद्देनजर यहां विशेष रुचि है, क्योंकि श्रीरामपुर विधानसभा क्षेत्र में भी टीएमसी का दबदबा है।

श्रीरामपुर क्षेत्र कोलकाता महानगरीय क्षेत्र के निकट है, जहां औद्योगिक विकास, नदी तट और कृषि का मिश्रण है। यहां की राजनीति में टीएमसी की मजबूत पकड़ है, लेकिन भाजपा ने हाल के वर्षों में चुनौती पेश की है। यह क्षेत्र आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक रूप से पश्चिम बंगाल के विकास का प्रतिनिधित्व करता है, जहां शहरीकरण और कृषि का संतुलन चुनौतीपूर्ण है।

–आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी


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