"यह धर्म का युद्ध नहीं बल्कि…" ईरान-इजरायल युद्ध के बीच खुशबू पटानी ने लोगों से की एकजुटता की अपील

मुंबई, 6 मार्च (आईएएनएस)। ईरान-इजरायल, और यूएसए के बीच चल रहे तनाव के बीच सोशल मीडिया पर देशभर में एक जंग छिड़ चुकी है। यूजर्स इस तनाव में भारत के रुख को लेकर आपस में लड़ रहे हैं।
भारत के सकारात्मक और नकारात्मक नजरिए से सोशल मीडिया पर कई चीजें देखने और सुनने को मिल रही हैं। इसी कड़ी में, भारतीय सेना का हिस्सा रही खुशबू पाटनी ने लोगों से अपील की है कि वे भावनात्मक तरीके से युद्ध का हिस्सा न बनें।
खुशबू पाटनी ने लोगों से अपील की है कि भारत के रुख के लेकर सोशल मीडिया पर जो बातें की जा रही हैं, वो बंद हो क्योंकि भारत सीधे इस ईरान-इजरायल और यूएसए में शामिल नहीं है, तो किसी को भी भावनात्मक रूप से कूदने की जरूरत नहीं है। खुशबू ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साफ किया कि लोग तनाव को धर्म की लड़ाई समझ रहे हैं, लेकिन यह धर्म की लड़ाई नहीं बल्कि पावर, सिक्योरिटी और क्षेत्रीय प्रभाव का खेल है, जो किसी की समझ से बाहर है।
उन्होंने लिखा, “जिसे लड़ना है, उसे लड़ने दो। जब तक भारत सीधे इस ईरान-इजरायल और यूएसए में शामिल नहीं है, हमें इसमें भावनात्मक रूप से कूदने की जरूरत नहीं है। यह कोई धार्मिक युद्ध नहीं है।” असल में, यह जियो जियोपॉलिटिक्स, सैन्य रणनीति और वैश्विक गठबंधन का मामला है, जो आम लोगों की समझ से कहीं ज्यादा जटिल होता है। सोशल मीडिया पर इसे धर्म बनाकर बेचा जा रहा है, लेकिन देशों के फैसले तेल, शक्ति संतुलन, सुरक्षा और क्षेत्रीय प्रभुत्व से तय होते हैं। ईरान हमारा देश नहीं है। किसी दूसरे देश की राजनीति के लिए अपने ही देशवासियों से लड़ना समझदारी नहीं है।
बता दें कि अली हुसैनी ख़ामेनेई की मौत के बाद देश का रुख काफी शांत था और सोशल मीडिया पर जंग छिड़ गई कि भारत ने अमेरिका की इस हरकत का विरोध नहीं किया, जबकि ईरान ने कई मौकों पर भारत का साथ दिया था। हालांकि भारत की तरफ से कंडोलेंस रजिस्टर पर किए हस्ताक्षर किए जा चुके हैं, जिसके बाद साफ है कि भारत भी युद्ध नहीं, शांति की अपील करता है।
–आईएएनएस
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