यूपी विधानसभा: सिंचाई, सड़क और नगर विकास पर सदन गरमाया, सत्ता-विपक्ष में तीखी बहस

लखनऊ, 18 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में बुधवार को किसानों की मुफ्त सिंचाई बिजली योजना और ग्रामीण सड़कों की बदहाली को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए।
सपा विधायक अतुल प्रधान ने सिंचाई विभाग के नलकूपों का मुद्दा उठाया। मंत्री ने योजना के आंकड़ों के साथ सरकार का पक्ष रखा। सदन में सड़क नवीनीकरण और नगर विकास योजनाओं को लेकर भी तीखी बहस देखने को मिली। विधानसभा के बजट सत्र के आठवें दिन बुधवार को किसानों को सिंचाई के लिए मुफ्त बिजली योजना को लेकर सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
मेरठ से सपा विधायक अतुल प्रधान ने निजी नलकूपों की मुफ्त सिंचाई योजना का मुद्दा उठाते हुए कहा कि यदि सरकार के पास यह आंकड़ा है कि पांच लाख किसानों ने पंजीकरण नहीं कराया, तो उनका पंजीकरण क्यों नहीं कराया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार यह कह रही है कि अपंजीकृत किसानों से बिजली बिल नहीं लिया जा रहा, जबकि उनके अनुसार किसानों पर बकाया आ रहा है।
संबंधित मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि वर्ष 2023 से किसानों के लिए सिंचाई को मुफ्त किया गया है। प्रदेश में 15,64,219 निजी नलकूप हैं, जिनमें से 10,59,041 किसानों ने पंजीकरण कराया है। उन्होंने कहा कि योजना का लाभ लेने के लिए पंजीकरण अनिवार्य है और जिन किसानों ने पंजीकरण नहीं कराया है, उनसे बिल वसूली की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सत्र के दौरान चित्रकूट सदर से सपा विधायक अनिल प्रधान ने अपने क्षेत्र की सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र की 90 प्रतिशत ग्रामीण संपर्क मार्ग जर्जर अवस्था में हैं और शिकायतों के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही।
इस पर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जवाब देते हुए कहा कि यह सपा सरकार नहीं, बल्कि योगी सरकार है, जहां सड़कों का नवीनीकरण पहले आठ वर्ष में होता था, अब पांच वर्ष में ही कराया जा रहा है। उन्होंने बताया कि खनन वाले क्षेत्रों में सड़कें शीघ्र खराब हो जाती हैं, लेकिन सरकार त्वरित मरम्मत सुनिश्चित कर रही है। चित्रकूट जनपद में सड़क नवीनीकरण के लिए 26 करोड़ 80 लाख रुपये आवंटित किए गए। सहारनपुर से सपा विधायक आशु मलिक ने नगर निगम में शामिल किए गए 32 गांवों को लेकर वित्तीय लाभ का प्रश्न उठाया।
मंत्री ने जवाब में कहा कि संबंधित नगर निगम वर्ष 2009 में गठित हुआ था, जबकि सीएम नगर योजना 2017 में शुरू की गई, इसलिए वह योजना उस पर लागू नहीं होती। हालांकि नई योजनाओं के माध्यम से विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
–आईएएनएस
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