एनआईए दिल्ली कोर्ट ने एलईटी के 2 ओवरग्राउंड वर्करों को 15 साल की सजा सुनाई


नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की दिल्ली स्थित विशेष अदालत ने शुक्रवार को पाकिस्तान समर्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के दो ओवरग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) को 2016 के मामले में अधिकतम 15-15 साल की सजा सुनाई।

दोनों आरोपियों ने 2016 में कश्मीर में घुसे एक पाकिस्तानी आतंकी को शरण, खाना और अन्य जरूरी सहयोग (लॉजिस्टिक सपोर्ट) दिया था। उस आतंकी का मकसद घाटी में आतंक फैलाना था।

कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा निवासी जाहूर अहमद पीर और नजीर अहमद पीर को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम की धारा 18 और 19 के तहत 15-15 साल की सजा सुनाई गई है। साथ ही धारा 39 के तहत 9 साल की सजा भी दी गई है। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी, यानी अधिकतम 15 साल की कैद होगी।

अदालत ने दोनों पर प्रत्येक धारा के तहत 50-50 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस तरह प्रत्येक आरोपी पर कुल 1.5 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है।

यह मामला लश्कर-ए-तैयबा की बड़ी साजिश से जुड़ा है। इसमें बहादुर अली उर्फ सैफुल्लाह नाम का एक पाकिस्तानी नागरिक और प्रशिक्षित आतंकी अन्य आतंकियों के साथ कुपवाड़ा (जम्मू-कश्मीर) के रास्ते भारत में घुसा था।

यह आतंकी समूह अत्याधुनिक हथियारों, गोला-बारूद, विस्फोटक, नेविगेशन उपकरण, नाइट विजन डिवाइस और संचार साधनों से लैस था। भारत में रहते हुए वे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में थे और उन्हें भारत में आतंकी हमले करने के निर्देश मिल रहे थे।

आतंकियों की योजना जम्मू-कश्मीर और दिल्ली समेत भारत के अन्य हिस्सों में कई हमले करने की थी। हालांकि 25 जुलाई 2016 को बहादुर अली को गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि उसके साथ घुसे दो अन्य आतंकी अबू साद और अबू दरदा सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे गए।

एनआईए ने जनवरी 2017 में बहादुर अली के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। उसने अपराध स्वीकार कर लिया था, जिसके बाद मार्च 2021 में उसे आईपीसी, यूएपीए, विस्फोटक अधिनियम, आर्म्स एक्ट और विदेशी अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कठोर कारावास की सजा दी गई।

आगे की जांच में जाहूर अहमद पीर और नजीर अहमद पीर की भूमिका सामने आई। जांच में पाया गया कि दोनों ने पाकिस्तानी आतंकी को सुरक्षित ठिकाना, खाना और अन्य सहायता उपलब्ध कराई थी। उन्होंने बहादुर अली की कश्मीर घाटी में अन्य पाकिस्तानी आतंकियों से मुलाकात भी कराई थी।

दोनों आरोपियों को सितंबर 2017 में गिरफ्तार किया गया था और मार्च 2018 में उनके खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया गया था। अदालत ने 18 दिसंबर 2025 को उन्हें दोषी ठहराया और आज सजा सुनाई। इस फैसले को कश्मीर में पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह देने वाले नेटवर्क के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

–आईएएनएस

एएमटी/एमएस


Show More
Back to top button