असम में 10 सड़क और 16 पुल परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने मंजूर की 747 करोड़ रुपए की राशि


नई दिल्ली, 13 फरवरी (आईएएनएस)। असम में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य में सड़क और पुल परियोजनाओं के लिए कुल 747.72 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “असम में केंद्रीय सड़क अवसंरचना निधि (सीआरआईएफ) स्कीम के तहत 10 रोड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए 617.98 करोड़ रुपए मंज़ूर किए गए हैं। इसके अलावा, ‘सीआरआईएफ सेतु बंधन स्कीम’ के तहत 16 ब्रिज प्रोजेक्ट्स के लिए 129.74 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं।

नितिन गडकरी ने कहा कि इन पहलों से इलाके की कनेक्टिविटी काफी बढ़ेगी, ट्रांसपोर्टेशन की क्षमता बढ़ेगी और यात्रा का समय कम होगा। इनसे लोकल व्यापार भी बढ़ेगा, सामान और लोगों का आना-जाना आसान होगा और राज्य के सामाजिक-आर्थिक विकास में मदद मिलेगी।

गौरतलब है कि पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम में 6,950 करोड़ रुपए से अधिक की लागत वाली काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना (एनएच-715 के कालियाबोर-नुमालीगढ़ खंड का 4-लेन निर्माण) का भूमि पूजन किया।

86 किलोमीटर लंबी काजीरंगा एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना पर्यावरण के प्रति सजग एक राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना है। इसमें 35 किलोमीटर का एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर होगा, जो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से होकर गुजरेगा, साथ ही 21 किलोमीटर का बाईपास खंड और एनएच-715 के मौजूदा राजमार्ग खंड का 30 किलोमीटर तक विस्तार करके इसे दो लेन से चार लेन का बनाया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य पार्क की समृद्ध जैव विविधता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए क्षेत्रीय संपर्क को बेहतर बनाना है।

यह परियोजना नागांव, कार्बी आंगलोंग और गोलाघाट जिलों से होकर गुजरेगी और ऊपरी असम, विशेष रूप से डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया से संपर्क को काफी बेहतर बनाएगी। यह एलिवेटेड वाइल्‍डलाइफ कॉरिडोर जानवरों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करेगा। इससे सड़क सुरक्षा में भी सुधार होगा, यात्रा का समय और दुर्घटना दर कम होगी व बढ़ता यात्री और माल यातायात सुगम होगा। इस परियोजना के अंतर्गत, जाखलबंधा और बोकाखाट में बाईपास बनाए जाएंगे। ये शहरों में भीड़भाड़ कम करने, शहरी आवागमन को बेहतर बनाने और स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर को सुधारने में सहायक होंगे।

–आईएएनएस

डीसीएच/


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