तमिलनाडु के कावेरी पुनरुद्धार योजना का काम शुरू होने में देरी, चुनाव से पहले शुरू होने के आसार कम


चेन्नई, 10 फरवरी (आईएएनएस)। तमिलनाडु के लिए एक प्रमुख पारिस्थितिक और सिंचाई जीवनरेखा के रूप में प्रस्तावित महत्वाकांक्षी 14,000 करोड़ रुपए की नदंथाई वाझी कावेरी नदी पुनर्स्थापन योजना प्रशासनिक और वित्तीय अड़चनों के कारण आगामी विधानसभा चुनावों से पहले शुरू होने की संभावना नहीं है।

एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी की ओर से डीएमके सरकार पर जानबूझकर परियोजना को रोकने का आरोप लगाने के बाद यह देरी एक राजनीतिक मुद्दा बन गई।

पलानीस्वामी ने दावा किया कि केंद्र ने पहले ही योजना को मंजूरी दे दी थी और राज्य सरकार पर कार्रवाई नहीं कर रही है। वहीं जल संसाधन विभाग (डब्ल्यूआरडी) के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि धीमी प्रगति के लिए प्रक्रियात्मक बाधाएं जिम्मेदार थीं, न कि राजनीति हो रही थी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “वित्त विभाग ने अभी तक आवश्यक मंजूरी नहीं दी है। साथ ही, जल संसाधन विकास विभाग, जल आपूर्ति एवं जल निकासी बोर्ड, टीएनईबी और राजस्व सहित लगभग 12 विभागों को समन्वय स्थापित करना होगा। परियोजना की व्यापकता को देखते हुए, चुनाव से पहले काम शुरू करना संभव नहीं है।”

एक अन्य अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय नदी संरक्षण निदेशालय ने पहले चरण के लिए 934 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं, जिसमें केंद्र और राज्य के बीच 60:40 का अनुपात रखा गया है। केंद्र सरकार 560 करोड़ रुपए का योगदान देगी, जबकि तमिलनाडु का हिस्सा 374 करोड़ रुपए होगा।

बता दें कि पहले चरण में मेटूर से तिरुची तक कावेरी नदी और इसकी प्रमुख सहायक नदियों जैसे तिरुमनिमुथार, सरबंगा, भवानी, अमरावती और नोय्याल के जीर्णोद्धार पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो लगभग 1,092 किलोमीटर की दूरी को कवर करता है। तिरुची से समुद्र तक शेष 214 किलोमीटर के क्षेत्र को दूसरे चरण में पूरा किया जाएगा।

डेल्टा क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यह परियोजना बहुत पहले ही हो जानी चाहिए थी। तिरुवरूर के किसान एम. रामासामी (52) ने कहा कि औद्योगीकरण और शहरी विकास ने पानी की गुणवत्ता और उपलब्धता को बुरी तरह प्रभावित किया है।

उन्होंने कहा, “प्रदूषण से मछलियां कम हो गई हैं, फसलें खराब हो गई हैं और पीने का पानी भी प्रभावित हुआ है। नदी अब वैसी नहीं रही जैसी पहले थी।”

उन्होंने कावेरी बेसिन के कई हिस्सों को अत्यधिक प्रदूषित बताने वाली पिछली प्रदूषण रिपोर्टों का भी हवाला दिया।

इस योजना में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, कपड़ा इकाइयों के लिए सामान्य अपशिष्ट जल उपचार सुविधाएं और नदी तट में सुधार का प्रस्ताव है।

कावेरी डेल्टा किसान संघ के अध्यक्ष केवी एलंकीरन ने कहा कि तिरुवरूर, नागपट्टिनम और मयिलादुथुराई जैसे अंतिम छोर के जिलों में पानी की कमी के कारण अक्सर साल में केवल एक ही फसल का मौसम होता है।

उन्होंने कहा, “अगर यह परियोजना लागू होती है, तो कृषि को पुनर्जीवित किया जा सकता है और किसान एक से अधिक मौसमों में खेती कर सकेंगे।”

–आईएएनएस

एसएके/एएस


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