भारत-अमेरिका ट्रेड डील से एआई हार्डवेयर सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा


नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के पहले चरण के पूरा होने को भारत के एआई हार्डवेयर सेक्टर के लिए एक बड़ा बढ़ावा माना जा रहा है, क्योंकि इससे एडवांस कंप्यूटिंग से जुड़े उपकरणों की लागत कम होने की उम्मीद है, जिससे देश में इनकी मैन्युफैक्चरिंग और क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

खालसा वॉक्स न्यूज पोर्टल में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक, यह पहली बार है जब दो बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच हुए किसी द्विपक्षीय व्यापार समझौते में एआई कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को रणनीतिक संपत्ति माना गया है, जिसका भारत के तकनीकी भविष्य पर लंबे समय तक असर पड़ सकता है।

अब तक इस सेक्टर की सबसे बड़ी समस्या जीपीयू सर्वर पर लगने वाला भारी आयात शुल्क रहा है, जो 20 से 28 प्रतिशत तक है। इसकी वजह से भारत में जीपीयू आधारित सेवाएं बहुत महंगी हो जाती हैं और सिंगापुर या यूएई जैसे देशों के मुकाबले कम प्रतिस्पर्धी बनती हैं।

लेख में बताया गया है कि इंडस्ट्री के अनुमान बताते हैं कि अगर इन टैक्स में कमी की जाती है तो जीपीयू से लैस डेटा सेंटर बनाने की लागत करीब 14 प्रतिशत तक घट सकती है। इससे देश में बड़े पैमाने पर निवेश का रास्ता खुल सकता है।

यह समय भारत के लिए अनुकूल माना जा रहा है क्योंकि भारत दुनिया के कुल डेटा का लगभग पांचवां हिस्सा पैदा करता है, लेकिन यहां ग्लोबल डेटा सेंटर क्षमता और एंटरप्राइज जीपीयू की संख्या बहुत कम है।

लेख के अनुसार, दुनिया की बड़ी क्लाउड और टेक कंपनियां दशक के अंत तक भारत में 80 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश कर सकती हैं। ट्रेड डील को एक ऐसे मौके के रूप में देखा जा रहा है जिससे भारत ग्लोबल एआई कंप्यूट सर्विसेज में मजबूत दावेदार बन सकता है।

लेख में यह भी बताया गया है कि विशेषज्ञों ने कुछ सावधानियों की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि एडवांस हार्डवेयर तक आसान पहुंच के साथ-साथ डेटा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और घरेलू वैल्यू क्रिएशन के लिए मजबूत नीतियां भी होनी चाहिए।

लेख में आगे कहा गया है कि अगर ऐसी नीतियां नहीं बनीं, तो खतरा है कि भारत सिर्फ कम मुनाफे वाली कंप्यूटिंग सेवाएं देगा और असली आर्थिक व रणनीतिक फायदा दूसरे देशों को मिल जाएगा।

–आईएएनएस

डीबीपी/


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