रवनीत बिट्टू के लिए राहुल गांधी का गद्दार वाला बयान बर्दाश्त से बाहर : शाजिया इल्मी

नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को ‘गद्दार दोस्त’ कहने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जिन शब्दों का इस्तेमाल किया है, वे बर्दाश्त के बाहर हैं।
आईएएनएस से बातचीत में इल्मी ने कहा कि इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करके राहुल गांधी खुद को ही नीचा दिखाते हैं और नेता प्रतिपक्ष के पद की गरिमा पर हमला करते हैं, क्योंकि जिस तरह के शब्द उन्होंने रवनीत बिट्टू के लिए इस्तेमाल किए हैं, वे बिल्कुल अस्वीकार्य हैं। अगर कोई व्यक्ति कांग्रेस पार्टी छोड़कर चला जाता है, तो क्या आप उसे गद्दार कह देंगे? कई लोग एक से दूसरे दल में जाते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयान पर शाजिया इल्मी ने कहा कि जिस तरह से ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में सबूत पेश करते समय भाषा का इस्तेमाल किया और जिस तरह उन्होंने एक संवैधानिक संस्था को व्हाट्सएप कमीशन बना दिया, उससे सबसे पहले तो यह समझ आता है कि उनके दिल में अपने देश की संवैधानिक संस्थाओं और पदों के प्रति कितना सम्मान है। ममता बनर्जी का वोट बैंक मुख्य रूप से घुसपैठियों पर आधारित है।
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में धर्मांतरण और महिलाओं को परेशान करने के मामले पर शाजिया इल्मी ने कहा कि जहां तक मैं समझती हूं, यह साफ है कि शमा बानो जो कुछ भी कर रही थी, वह हर दृष्टि से गलत थी। संवैधानिक दृष्टि से भी और धार्मिक दृष्टि से भी। कुरान में कहीं भी जबरदस्ती, दबाव या धमकी के जरिए धर्म परिवर्तन का कोई जिक्र नहीं है।
उन्होंने कहा कि हमारे प्रधानमंत्री ने बहुत पहले ही कहा था कि हर मुसलमान के एक हाथ में कुरान शरीफ और दूसरे हाथ में कंप्यूटर होना चाहिए। इसलिए मुझे लगता है कि यह बहुत जरूरी है कि मुस्लिम बच्चे वह सब पढ़ें जो उनके आगे बढ़ने, सरकारी नौकरियों के लिए प्रवेश परीक्षा देने और देश की मुख्यधारा में पूरी तरह शामिल होने के लिए आवश्यक है।
यूपी में मदरसों की जांच को लेकर भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने कहा कि यह बहुत जरूरी कदम है। हमारे मदरसों में बहुत सारे छोटे बच्चे पढ़ते हैं। यह जानना अत्यंत आवश्यक है कि वहां का पाठ्यक्रम क्या है, बच्चों को क्या पढ़ाया जा रहा है, इसका ऑडिट कैसे हो रहा है, पैसा कहां से आ रहा है और उन्हें क्या-क्या सिखाया जा रहा है। मुझे लगता है कि पूरे धन के लेन-देन की पारदर्शिता भी जानना बहुत जरूरी है।
–आईएएनएस
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