यूपी में चीनी मांझे पर सख्ती, मौत हुई तो लगेगा हत्या का मुकदमा : मंत्री अनिल राजभर


लखनऊ, 5 फरवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर ने चीनी मांझे पर प्रतिबंध, समाजवादी पार्टी की वोटर लिस्ट और चुनाव आयोग पर सवाल समेत कई मुद्दों को लेकर कड़ा रुख अपनाया।

उत्तर प्रदेश में चीनी मांझे पर प्रतिबंध को लेकर मंत्री अनिल राजभर ने बेहद सख्त रुख दिखाया। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि सिर्फ जांच ही नहीं, बल्कि प्रतिबंध के बाद भी यदि किसी दुकान से बिके मांझे से किसी की जान जाती है, तो संबंधित व्यक्ति पर हत्या का मुकदमा चलेगा और उसे जेल भेजा जाएगा।

उन्होंने कहा कि चीनी मांझे से अब तक कई लोगों की जान जा चुकी है और अनेक लोग घायल हुए हैं। इसे रोकना बेहद जरूरी था। सरकार का यह फैसला कठोर, निर्णायक और जनहित में है। इसका असर न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे देश में देखने को मिलेगा।

मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि सिख समुदाय के लोग देशभर में प्रदर्शन कर रहे हैं और माफी की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सार्वजनिक और महत्वपूर्ण स्थान पर किसी व्यक्ति या समुदाय का अपमान करने का किसी को अधिकार नहीं है। उन्होंने नेताओं को नसीहत देते हुए कहा कि अपने कर्म, नीतियों और आचरण पर नजर डालनी चाहिए। देश की जनता ने किनका साथ छोड़ा है, कितने नेता दल बदल चुके हैं, यह सबको अपने गिरेबान में झांककर देखना चाहिए।

उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड को खत्म करने के फैसले पर मंत्री ने कहा कि सरकार की मंशा साफ है। सरकार चाहती है कि मदरसे में पढ़कर निकलने वाले बच्चे भी डॉक्टर, इंजीनियर और अधिकारी बनें और देश के निर्माण में योगदान दें। अल्पसंख्यक बोर्ड को भी सार्थक काम मिले, इसी सोच के तहत यह फैसला लिया गया है। उन्होंने इसे एक अच्छा और स्वागतयोग्य कदम बताया।

समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए अनिल राजभर ने कहा कि सपा लगातार गलत बयानबाजी कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने चुनाव आयोग पर हमला करने और उसे कटघरे में खड़ा करने को अपनी रणनीति बना ली है। चुनाव आयोग ने जो अधिकार भारतीय जनता पार्टी को दिए हैं, वही अधिकार समाजवादी पार्टी, अन्य राजनीतिक दलों और आम जनता को भी दिए हैं।

राजभर ने एसआईआर को लेकर स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि जिसकी उम्र 18 साल पूरी हो जाती है, उसका नाम मतदाता सूची में आना चाहिए। इसके लिए फॉर्म-7 जैसी वैधानिक प्रक्रिया मौजूद है। वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद यदि किसी को लगता है कि कोई नाम गलत तरीके से शामिल हुआ है, तो वह आपत्ति दर्ज करा सकता है। जो लोग फर्जी वोटरों की जांच से बेचैन हैं, उन्हें डर है कि अगर फर्जी नाम हट गए तो उनके राजनीतिक हित प्रभावित होंगे, इसी कारण वे हताशा और तनाव में हैं।

–आईएएनएस

वीकेयू/एबीएम


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