अमेरिका के साथ परमाणु हथियार नियंत्रण समझौता समाप्त, रूस ने दिए अगले कदम खुद तय करने के संकेत


मॉस्को, 5 फरवरी (आईएएनएस)। रूस के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अब रूस और अमेरिका के बीच हुए न्यू स्ट्रैटेजिक आर्म्स रिडक्शन ट्रीटी यानी न्यू स्टार्ट समझौते से जुड़ी कोई बाध्यता दोनों देशों पर नहीं रह गई है। मंत्रालय का मानना है कि समझौते की अवधि खत्म होने के बाद अब दोनों पक्ष इसके नियमों को मानने के लिए मजबूर नहीं हैं।

रूस के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को बताया कि परमाणु हथियारों की तय सीमा को समझौते की समाप्ति के बाद भी स्वेच्छा से बनाए रखने के रूस के प्रस्ताव पर अमेरिका की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक और साफ जवाब नहीं मिला है। यह समझौता 5 फरवरी को खत्म हो चुका है।

मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा हालात में रूस यह मानता है कि न्यू स्टार्ट समझौते से जुड़े सभी पक्ष अब इस समझौते की शर्तों और आपसी घोषणाओं से मुक्त हो चुके हैं। इसमें समझौते के मुख्य नियम भी शामिल हैं। अब दोनों देश अपने अगले कदम खुद तय करने के लिए स्वतंत्र हैं।

रूस ने यह भी कहा कि यदि उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा को किसी नए खतरे का सामना करना पड़ा, तो वह उससे निपटने के लिए कड़े सैन्य और तकनीकी कदम उठाने के लिए तैयार है। समाचार एंजेसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, हालांकि मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि अगर सही हालात बनते हैं, तो रूस रणनीतिक स्थिरता बनाए रखने के लिए राजनीतिक और कूटनीतिक बातचीत के लिए भी तैयार है।

न्यू स्टार्ट समझौता रूस और अमेरिका के बीच वर्ष 2010 में हुआ था। इसका उद्देश्य दोनों देशों के परमाणु हथियारों और उन्हें ले जाने वाले साधनों की संख्या को सीमित करना था। यह समझौता 5 फरवरी 2011 से लागू हुआ था। पहले इसकी अवधि 10 साल की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 5 फरवरी 2026 तक कर दिया गया।

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने सितंबर 2025 में कहा था कि अगर अमेरिका ऐसे कदम नहीं उठाता जिससे रणनीतिक संतुलन बिगड़े, तो रूस समझौते की मूल सीमाओं का पालन समाप्ति के बाद भी एक साल तक करता रहेगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जनवरी में कहा था कि उन्हें इस समझौते के खत्म होने की ज्यादा चिंता नहीं है और उन्हें उम्मीद है कि दोनों देश किसी नए समझौते पर पहुंच सकते हैं।

गौरतलब है कि न्यू स्टार्ट समझौता ही अब रूस और अमेरिका के बीच हथियार नियंत्रण से जुड़ा आखिरी बड़ा समझौता बचा है। इससे पहले अमेरिका वर्ष 2019 में इंटरमीडिएट-रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज ट्रीटी से बाहर निकल चुका है।

–आईएएनएस

एएस/


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