निर्देशक की अहमियत पर बोले संजय मिश्रा, 'सही निर्देशन मिले तो अभिनेता भी चमत्कार कर सकता है'


मुंबई, 2 फरवरी (आईएएनएस)। बॉलीवुड अभिनेता संजय मिश्रा अपनी सादगी के दम पर दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाए रखते हैं। छोटे शहरों की कहानियों से लेकर गंभीर किरदारों तक, संजय मिश्रा हर भूमिका में खुद को आसानी से ढाल लेते हैं। इन दिनों वह अपनी आने वाली फिल्म ‘वध 2’ को लेकर चर्चा में हैं। इसी कड़ी में उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से अपने अभिनय, निर्देशक की भूमिका और निजी जीवन के अनुभवों को लेकर खुलकर बात की है।

संजय मिश्रा ने कहा, ”मैंने ‘वध 2’ में खुद को पूरी तरह निर्देशक की सोच के हवाले कर दिया था। एक अभिनेता चाहे कितना भी मेहनती और प्रतिभाशाली क्यों न हो, लेकिन वह पर्दे पर कैसा दिखाई देगा, यह काफी हद तक निर्देशक तय करता है। लोग जब मेरी परफॉर्मेंस की तारीफ करते हैं, तो मैं मानता हूं कि इसका बड़ा श्रेय निर्देशक को जाना चाहिए। निर्देशक ही यह तय करता है कि किसी किरदार को किस रंग में, किस भाव में और किस गहराई के साथ पेश किया जाएगा। अभिनेता उस सोच को निभाने का माध्यम भर होता है।”

संजय मिश्रा ने अपनी बात को स्पष्ट करते हुए एक उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा, ”अभिनेता रंगों की तरह होते हैं, और निर्देशक उन रंगों से फिल्म का कैनवस बनाता है। थोड़ा सा रंग किसी और किरदार का, थोड़ा सा अपने अनुभव का और थोड़ा सा सह-कलाकारों का, इन सबको मिलाकर निर्देशक कहानी को आकार देता है।”

फिल्म ‘वध’ में अपने किरदार का जिक्र करते हुए संजय मिश्रा ने कहा, ”मेरा किरदार शंभूनाथ को कब चुप रहना है, कब बोलना है और अपनी पत्नी मंजू के सामने कितना बोलना है, यह सब निर्देशक की समझ का नतीजा है। यह तय करना कि किरदार की खामोशी कब बोलेगी और उसके शब्द कब असर करेंगे, निर्देशक का काम है। अगर किसी अभिनेता को गलत तरीके से पेश किया जाए तो उसकी एक्टिंग भी कमजोर लग सकती है, लेकिन अगर निर्देशक सही मौका दे और सही ढंग से दिखाए तो वही अभिनेता फिल्म में गहराई और सच्चाई जोड़ सकता है।”

उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के बारे में भी बात करते हुए कहा, ”मैंने बचपन में एक ऐसी जिंदगी देखी है, जहां सीमित आमदनी में पूरा परिवार चलाना पड़ता था। त्योहार आते थे, लेकिन जेब में ज्यादा पैसे नहीं होते थे। चार बच्चों, घर और जिम्मेदारियों के बीच संघर्ष भरी जिंदगी मैंने बहुत करीब से देखी है। यही अनुभव आज भी मेरे भीतर जिंदा है और अभिनय को दमदार बनाता है। मेरे अंदर संवेदनशीलता, समझ और जीवन को देखने का नजरिया वहीं से आया है। यही वजह है कि मेरे किरदार लोगों को महसूस होते हैं।”

उन्होंने कहा, ”एक अभिनेता की असली पूंजी उसके जीवन के अनुभव होते हैं, जो सही निर्देशन मिलने पर पर्दे पर असर छोड़ते हैं।”

‘वध 2’ 6 फरवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

–आईएएनएस

पीके/डीकेपी


Show More
Back to top button