सामाजिक न्याय को लागू करने के लिए ग्राउंड रियलिटी बिल्कुल अलग है: रामगोपाल यादव


नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। राज्यसभा सांसद रामगोपाल यादव ने सोमवार को सदन में सरकार की विभिन्न कल्याणकारी परियोजनाओं का जिक्र किया। वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के तहत चर्चा कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य सुविधाओं से लेकर सामाजिक न्याय की योजनाओं को जमीनी स्तर पर ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है।

वहीं, ग्रामीण इलाकों में विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सामान्य लोगों तक नहीं पहुंच रहा।

रामगोपाल यादव ने कहा कि चौथे पैरा में राष्ट्रपति द्वारा सोशल जस्टिस की बात की गई, लेकिन सामाजिक न्याय को लागू करने के लिए ग्राउंड रियलिटी बिल्कुल डिफरेंट है। जो दिखाया जा रहा है उससे हटकर है।

यादव ने कहा कि अभी कुछ दिनों पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर के पदों के लिए इंटरव्यू हुए थे। कुछ कैंडिडेट इंटरव्यू देने के बाद रिजल्ट शीट लेकर आए थे। उसमें जनरल कैटगरी के कैंडिडेट सिलेक्ट हुए। लेकिन ओबीसी, एससी और एसटी कैटेगरी के कैंडिडेट्स का चयन नहीं हुआ। उनके सामने लिखा था- नॉट फाउंड सूटेबल।

उन्होंने कहा कि लिखित परीक्षा में इन लोगों के नंबर ज्यादा थे, लेकिन इंटरव्यू में पास नहीं हुए। क्या यही सोशल जस्टिस है। एक अन्य घटना का जिक्र करते हुए राम गोपाल ने कहा कि धरातल स्तर पर आजादी के इतने दिनों बाद की स्थिति इतनी भयावह है, आगरा जिले में जाटवों एक बारात जा रही थी। दूल्हा घोड़ी पर बैठा हुआ था कुछ लोग उसको निकलने नहीं दे रहे थे। कहा जा रहा था कि घोड़े पर बैठकर नहीं जा सकता। आगरा के पुलिस कमिश्नर को टेलीफोन किया गया तब पुलिस ने जाके बारात चढ़ाई।

उन्होंने इस घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हम सामाजिक न्याय की बात करते हैं और जाति के आधार इतना भेदभाव हो रहा है। राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि केवल कुछ प्रतियोगी परीक्षाओं को छोड़कर सारी नियुक्तियां आउटसोर्सिंग से व कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर हो रही है। उन्होंने कहा कि न आउटसोर्सिंग में रिजर्वेशन है न कॉन्ट्रैक्ट में रिजर्वेशन है। यूपीएससी से आईएएस बनने के बाद, लंबी सर्विस करने के बाद जब राज्यों में कोई अधिकारी प्रमुख सचिव स्तर का व्यक्ति हो जाता केन्द्र में ज्वाइंट सेक्रेटरी डेपुटेशन पर आता है।

रामगोपाल ने कहा कि आपकी सरकार सीधे ऐसे व्यक्तियों को ज्वाइंट सेक्रेटरी बना रही है, जिन्होंने कभी कोई यूपीएससी की परीक्षा नहीं दी। इनकी क्या क्वालीफिकेशन है, किसी बड़े बिजनेसमैन के यहां नौकरी करते रहे। उन्होंने कहा कि इन व्यक्तियों में कोई भी पिछड़े वर्गों से नहीं हैं। तो ऐसी स्थिति में हम किस आधार पर सोशल जस्टिस की बात कर रहे हैं।

उन्होंने एक अन्य उदाहरण देते हुए कहा कि जल जीवन मिशन के तहत गांवों में नल से पानी मिलने के पोस्टर लगा दिए गए। लेकिन अब जाकर कुछ जगह पानी की टंकियां बननी शुरू हुई हैं। उन्होंने कहा कि ईटावा जिले का सर्वेक्षण करवाया है और 95 प्रतिशत गावों में इस योजना के तहत पानी नहीं आया है।

–आईएएनएस

जीसीबी/एएसएच


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