राहुल गांधी को यही नहीं समझ आता है कि बोलना क्या है: हर्ष मल्होत्रा

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय बजट 2026-27 की एक तरफ जहां सत्ता पक्ष जमकर तारीफ कर रहा है, वहीं विपक्ष कमियां गिना रहा है। समाजवादी पार्टी नेता जिया उर रहमान बर्क का कहना है कि जनता को ठगा गया है। इसके साथ ही विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा सदन में बिना पब्लिश हुई किताब का जिक्र किए जाने पर तमाम नेताओं ने प्रतिक्रिया दी है।
संसद परिसर में जिया उर रहमान ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि बजट को लेकर पीएम मोदी और उनकी सरकार खुद अपनी पीठ थपथपा रही हैं, जबकि आम जनता खुद कह रही है कि उन्हें ठगा गया है। युवाओं और महिलाओं को नजरअंदाज किया गया है। यह बजट सिर्फ पांच प्रतिशत आबादी के लिए है। बाकी सबको नजरअंदाज किया गया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले भी मदरसा के लोगों को परेशान किया जा रहा था। इसके बाद हाईकोर्ट के फैसले से थोड़ी राहत मिली। हमें उम्मीद है कि जब-जब ये परेशान करेंगे, तब-तब हमें कोर्ट से राहत मिलेगी। आपको जानकारी मांगने का अधिकार है, लेकिन हवा में आरोप लगाना सही नहीं है। सरकार की वजह से वे मदरसे नहीं चल रहे हैं, लोग मदद करके उन्हें चला रहे हैं। इससे सिर्फ यही समझ आता है कि आप मुसलमानों को दबाना और परेशान करना चाहते हैं।
सपा सांसद जावेद अली खान ने कहा कि विदेश फंडिंग से जुड़े मामलों की जांच करना गृह मंत्रालय का काम है। कोई विधायक या मंत्री अगर विदेश फंडिंग का आरोप लगाकर कुछ कहे तो वह गृह मंत्रालय के कामों में दखल दे रहा है।
शिवसेना सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि अभी के हिसाब से पहले की नीतियों की तुलना करना ठीक नहीं है। साल 2005 में राष्ट्रपति ने जो भी कहा था, वह उस समय के हिसाब से कहा था, और आज समय के साथ तकनीक में बहुत बदलाव आ गया है। उन्होंने कहा कि पहले मंदिर और मस्जिद के झगड़े नहीं थे।
नेता प्रतिपक्ष द्वारा सदन में अपनी बात रखने पर भाजपा सांसद हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि राहुल गांधी को यही नहीं समझ आता है कि बोलना क्या है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलना था, लेकिन वह जानबूझकर दूसरी रिपोर्ट पर बोल रहे हैं। वे अपनी खीझ निकाल रहे हैं।
भाजपा सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत ने राहुल गांधी पर कहा कि सदन में नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। उत्पात मचाया जा रहा है। जिस किताब को प्रकाशित ही नहीं किया गया, उसके आधार पर बयान दिए जा रहे हैं। यह तो अपराध है। उन्हें सदन का सम्मान ही नहीं है। घंटों भर उन्होंने हंगामा किया।
सपा सांसद नीरज मौर्य ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि सरकार न तो चर्चा करना चाहती है और न ही तथ्यों पर बातचीत करना चाहती है। अगर कोई व्यक्ति बोल रहा है, तो उसे बोलने तो दीजिए। बोलने पर ही बार-बार रोका जा रहा है। यह सदन की परंपरा नहीं रही है। विपक्ष के नेता की बात सुनी जानी चाहिए। अगर वह कुछ गलत बोल रहे हैं, तो आपके पास जवाब देने के लिए समय तो है ही।
शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे का कहना है कि सदन नियमों से चलता है। उन्हें बार-बार बताया गया कि ये नियम हैं। राहुल गांधी विपक्ष के नेता हैं, उनके पद की एक गरिमा है। उन्हें ही समझ नहीं आ रहा है कि क्या बोलना है?
उन्होंने कहा कि कल कोई भी कुछ भी अपनी किताब में लिख देगा, तो क्या आप उसे लेकर सदन में पढ़ने लगेंगे? किसी के चरित्र पर सवाल उठा देंगे? किसी किताब का हवाला देकर हम भी उन पर और उनके परिवार पर आरोप लगा दें, तो क्या यह ठीक है? सदन नियमों से चलता है।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा कि उन्हें बोलने की आजादी है, लेकिन इस आजादी के साथ ही कुछ चीजों को न बोलने की बात भी कही गई है। यह बात सभी देशवासियों पर लागू होती है। उन्होंने जिस किताब का आधार दिया, जब उसके बारे में पूछा गया, तो उनके पास कोई जवाब ही नहीं था, क्योंकि उन्हें पता ही नहीं है। किसी ने लिखकर दे दिया था, और आकर वह बोलने लगे।
–आईएएनएस
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