दिल्ली: डीडीए यमुना जैव विविधता पार्क में विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026 मनाया गया


नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के यमुना जैव विविधता पार्क ने सोमवार को पुनर्स्थापित आर्द्रभूमि के निकट स्थित अपने एम्फीथिएटर में विश्व आर्द्रभूमि दिवस मनाया। यह कार्यक्रम “आर्द्रभूमि और पारंपरिक ज्ञान: सांस्कृतिक विरासत का उत्सव” विषय पर केंद्रित था, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि आर्द्रभूमि संरक्षण पारंपरिक प्रथाओं में गहराई से निहित है और यह कोई आधुनिक अवधारणा नहीं है।

कार्यक्रम में 350 से अधिक प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिनमें दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों, एसपीएम कॉलेज, केशव महाविद्यालय, स्कूल ऑफ बिजनेस इकोनॉमिक्स, जाकिर हुसैन कॉलेज, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज, आईपी कॉलेज फॉर विमेन, दिल्ली कौशल एवं उद्यमिता विश्वविद्यालय, सत्यवती कॉलेज, एमवी कॉलेज ऑफ एजुकेशन, माता सुंदरी कॉलेज और शिवाजी कॉलेज के छात्र, शोधकर्ता, यूपीएससी के उम्मीदवार, शिक्षाविद, पत्रकार, प्रकृति प्रेमी, स्थानीय समुदाय और डीडीए अधिकारी शामिल थे।

दिल्ली विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष, डॉ. एन सरवणा कुमार ने सभा को संबोधित किया और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से शहरों की रक्षा के लिए भूमि प्रबंधन और शहरी शासन के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दिल्ली के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 15 प्रतिशत भाग डीडीए पार्कों से आच्छादित है, जो जनता के लिए सुलभ हैं, और सीईएमडीई (डीयू) के सहयोग से डीडीए द्वारा विकसित सात जैव विविधता पार्क दिल्ली के नागरिकों के जीवन स्तर में उल्लेखनीय सुधार ला रहे हैं।

उन्होंने यमुना के बाढ़क्षेत्रों से अतिक्रमण हटाने और बांसेरा और असिता पार्कों के विकास में डीडीए की भूमिका पर भी जोर दिया और छात्रों को इन पारिस्थितिक स्थलों का दौरा करने के लिए प्रोत्साहित किया।

प्रोफेसर सीआर बाबू ने इस बात पर जोर दिया कि सभी नदियां आर्द्रभूमियों (चाहे हिमनद हों, झीलें हों या तालाब) से निकलती हैं और इस बात पर बल दिया कि पृथ्वी का अस्तित्व आर्द्रभूमियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर निर्भर करता है। उन्होंने बताया कि विश्व की 87 प्रतिशत से अधिक आर्द्रभूमियां विलुप्त हो चुकी हैं और बची हुई अधिकांश आर्द्रभूमियां अनुपयोगी हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग के डॉ. शशांक शेखर ने नदी प्रवाह को बनाए रखने में आर्द्रभूमि की भूमिका को समझाया। उन्होंने बताया कि बाढ़ के मैदानों पर विकसित जैव विविधता पार्क पोषक तत्वों के चक्र को नियंत्रित करने, प्रदूषण को कम करने और नदियों को पोषक तत्वों के जमाव से बचाने में सहायक होते हैं।

दिल्ली विश्वविद्यालय के व्यवसाय अर्थशास्त्र विभाग की प्रोफेसर यामिनी गुप्त ने आर्द्रभूमि के आर्थिक मूल्य पर प्रकाश डाला, जो 26.4 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो कई देशों के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अधिक है।

राजधानी कॉलेज और स्वाध्याय सेवा फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित फोटोग्राफी प्रतियोगिता के पुरस्कार समारोह के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ, जिसके बाद डॉ. एम. शाह हुसैन ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। प्रतिभागियों ने निर्देशित प्रकृति पथ पर सैर का भी आनंद लिया, जिसमें उन्होंने वाईबीपी के आर्द्रभूमि क्षेत्रों का अनुभव किया और उत्तरी शोवेलर, उत्तरी पिंटेल, ग्रेट कॉर्मोरेंट, गैडवाल और टील जैसी प्रवासी पक्षी प्रजातियों को देखा।

–आईएएनएस

एमएस/


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