भारत नफरत की भावना के साथ अन्य देशों से व्यवहार नहीं करता : सी. सदानंदन मास्टर

नई दिल्ली, 2 फरवरी (आईएएनएस)। राज्यसभा में सोमवार को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पेश किया गया। उच्च सदन में यह प्रस्ताव सी. सदानंदन मास्टर द्वारा प्रस्तुत किया गया। यह राज्यसभा में उनका पहला भाषण था, जिसे उन्होंने राष्ट्र के प्रति कृतज्ञता, प्रेरणा और लोकतांत्रिक मूल्यों के सशक्त समर्थन के रूप में रखा। उन्होंने कहा कि भारत कभी भी नफरत या शत्रुता की भावना के साथ अन्य देशों से व्यवहार नहीं करता।
सी. सदानंदन मास्टर ने धन्यवाद प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि वे राष्ट्रपति द्वारा नामित सदस्य हैं और इस महान सदन में बोलने का अवसर मिलना उनके लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि दिव्यांग होने के बावजूद भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें इस सदन का सदस्य बनने का अवसर दिया, जिसके लिए वे राष्ट्रपति के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार जताते हुए कहा कि देश की सेवा करने का यह अवसर उनके लिए सम्मान की बात है।
उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण का समर्थन करते हुए कहा कि यह भाषण विकसित भारत की दिशा में देश की यात्रा का स्पष्ट और आत्मविश्वास से भरा दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। राष्ट्रपति के संबोधन में राष्ट्रीय एकता, समावेशी विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, बुनियादी ढांचे का विस्तार, तकनीकी प्रगति और सामाजिक न्याय जैसे विषयों को प्रभावी ढंग से रखा गया है। उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत ने अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं और यही उपलब्धियां वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की मजबूत नींव हैं। यह अभिभाषण केवल अस्तित्व की बात नहीं करता, बल्कि सशक्त और आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ने का संदेश देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सामाजिक न्याय का अर्थ है कि हर नागरिक बिना किसी भेदभाव के अपने अधिकारों का पूर्ण उपयोग कर सके।
सी. सदानंदन मास्टर ने राष्ट्रपति द्वारा ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के उल्लेख को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् केवल एक राष्ट्रीय गीत नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति समर्पण और बलिदान की भावना का प्रतीक है। यह गीत हमें उन महान स्वतंत्रता सेनानियों की याद दिलाता है, जिनके त्याग के कारण आज हम एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश में सांस ले पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का संदेश यह दर्शाता है कि वर्तमान सरकार लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। अपने भाषण के दौरान उन्होंने एक देशभक्ति प्रार्थना की पंक्तियों का भी उल्लेख किया, जिसे उन्होंने एक राष्ट्रभक्त संगठन ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ से सीखा है, जो अपने सौ वर्षों की यात्रा पूरी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि उस प्रार्थना का सार यह है कि व्यक्ति अपना जीवन मातृभूमि को समर्पित करे और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करे। इसी भावना से विकसित भारत की संकल्पना जुड़ी हुई है। राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में सी. सदानंदन मास्टर ने भारत की वैश्विक भूमिका और सुरक्षा दृष्टिकोण को भी रेखांकित किया।
इस अवसर पर सी. सदानंदन मास्टर ने भारत की विदेश नीति, वैश्विक नेतृत्व, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार रखे। धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए सी. सदानंदन मास्टर ने कहा कि भारत कभी भी नफरत या शत्रुता की भावना के साथ अन्य देशों से व्यवहार नहीं करता। उन्होंने कहा कि भारत सभी देशों को मित्र के रूप में देखता है, चाहे उनकी जनसंख्या कितनी भी हो, त्वचा का रंग कुछ भी हो या उनकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो। यह भारत की “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत सार्क और ब्रिक्स जैसे कई अंतरराष्ट्रीय मंचों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है, ताकि देशों के बीच आपसी सहयोग बढ़े, वैश्विक सुरक्षा मजबूत हो और सार्वभौमिक भाईचारे की भावना को बढ़ावा मिले।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि देश की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय गरिमा से कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “भारत आज दुनिया के लिए मार्गदर्शक प्रकाश बना हुआ है और राष्ट्र व उसके नागरिकों की सुरक्षा से कभी भी समझौता नहीं करेगा।”
उन्होंने राष्ट्रपति के अभिभाषण का हवाला देते हुए कहा कि आज करोड़ों भारतीय सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आ चुके हैं। यह शासन व्यवस्था में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जहां नीति और राजनीति का केंद्र अब आम नागरिक बन गया है। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन सुनिश्चित करता है कि विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का संदेश स्पष्ट है कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनके लाभ जमीन पर दिखाई दें और हर नागरिक तक पहुंचें।
सी. सदानंदन मास्टर ने कहा कि वे इस सदन में नए हैं और अपने दायित्वों के निर्वहन के लिए सभी सम्मानित सदस्यों से सहयोग और मार्गदर्शन की अपेक्षा रखते हैं।
–आईएएनएस
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