बजट में किसानों के हितों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया: हर्षवर्धन सपकाल


मुंबई, 1 फरवरी (आईएएनएस)। महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने रविवार को कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा पेश किया गया बजट पिछले बजट से अलग नहीं है।

उन्होंने कहा कि यह बजट किसी भी सामाजिक वर्ग को संतुष्ट करने के लिए नहीं है, बल्कि सिर्फ बड़े-बड़े आंकड़ों और दावों तक सीमित है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की गई है और यह पूरी तरह से दिशाहीन है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि देश में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए एक ठोस नीति की आवश्यकता है, लेकिन इस बजट में रोजगार सृजन के लिए कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। किसानों के हितों के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया है। आयकर देने वाले कार्यरत वर्ग और मध्यम वर्ग को कोई राहत नहीं दी गई है। घोषित विकास दर के लक्ष्यों को प्राप्त करना भी मुश्किल लग रहा है, और केंद्र सरकार का यह बजट केवल घोषणाओं तक ही सीमित है।

सपकाल ने कहा कि नोटबंदी और जीएसटी के कारण देश के लघु, मध्यम और वृहद उद्यम पूरी तरह से कमजोर हो गए हैं, और इस क्षेत्र का अब तक कोई ठोस विकास नहीं हुआ है, और इस बजट से भी इसे कोई ठोस समर्थन नहीं मिला है।

उन्होंने कहा कि देश में अधिकांश रोजगार इसी क्षेत्र से उत्पन्न होता है, लेकिन सरकार ने इस वास्तविकता को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है। मोदी सरकार के कार्यकाल में बेरोजगारी में भारी वृद्धि हुई है और नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दो स्नातकों में से एक बेरोजगार है। बेरोजगारी दर 50 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार निवेश और रोजगार सृजन के मामले में विफल रही है।

उन्होंने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, फिर भी इस बजट ने किसानों को निराश किया है। पिछले 12 वर्षों में किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य पूरा नहीं हुआ है। इसके विपरीत, खेती की लागत दोगुनी हो गई है, कृषि उपज को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा रहा है, और किसान आत्महत्याएं बढ़ रही हैं। इन गंभीर मुद्दों पर बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं है। सरकार को यह समझना चाहिए कि किसानों की समस्याओं का समाधान केवल 6 हजार रुपए वार्षिक भुगतान से नहीं हो सकता।

सपकाल ने कहा कि सरकार दावा कर रही है कि 10 वर्षों में 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकल चुके हैं, लेकिन हकीकत यह है कि 80 करोड़ लोगों को आज भी 5 किलो अनाज ही मिल रहा है।

–आईएएनएस

एमएस/


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