जब अभिनेताओं से ज्यादा कमाने वाली सुरैया ने रूढ़िवादी सोच के सामने मानी हार, कुर्बान कर दिया अपना 'प्यार'


मुंबई, 31 जनवरी (आईएएनएस)। 1947 से पहले, जहां देश में महिलाओं को घर से निकलने की आजादी नहीं थी, उस समय एक बड़े पर्दे पर अपने रूप, रंग और आवाज से एक अभिनेत्री हिंदी सिनेमा में मेल सुपरस्टार से ज्यादा कमा रहीं थीं।

हम बात कर रहे हैं 40 के दशक की दिग्गज अभिनेत्री सुरैया की। उनकी खूबसूरती के चर्चे हिंदी सिनेमा में आम थे और यही वजह थी कि हर कोई उन्हें अपनी फिल्मों में लेना चाहता था। आज उनकी पुण्य तिथि (31 जनवरी) के मौके पर अभिनेत्री के बारे में जानेंगे।

सुरैया का फिल्मी सफर महज 12 साल की उम्र में शुरू हुआ, जब वह अपने मामा एम. जहूर के साथ फिल्म सेट पर जाया करती थीं। एम. जहूर उस समय हिंदी सिनेमा के जाने माने विलेन के रूप में जाने जाते थे।

इस बीच सुरैया को फिल्म ‘ताज महल’ में युवा मुमताज महल का पहला रोल मिला। ऑल इंडिया रेडियो के लिए प्रस्तुति देते समय संगीतकार नौशाद ने उनकी स्वाभाविक गायन प्रतिभा को पहचाना, जिसके बाद उन्होंने साल 1942 में फिल्म ‘शारदा’ से पार्श्व गायन की शुरुआत की। उन्होंने 300 से ज्यादा गाने गाए, जो उस दौर की किसी अभिनेत्री-गायिका के लिए एक दुर्लभ उपलब्धि थी। हिंदी सिनेमा में उनके योगदान को देखते हुए अभिनेत्री को उपमहाद्वीप की मलिका-ए-तरान्नुम से नवाजा गया था।

हिंदी सिनेमा पर राज करने वाली सुरैया की खूबसूरती के दीवानों की कमी नहीं थी और उन्हीं में से एक थे एक्टर देव आनंद साहब। सुरैया और देव आनंद की जोड़ी स्क्रीन पर सुपरहिट थी और यही कारण था कि दोनों ने एक साथ 7 फिल्मों में काम किया। दोनों ने साथ में पहली बार विद्या नाम की फिल्म की, जिसके बाद जीत, शायर और अफसर जैसी फिल्मों में नजर आए। दोस्ती कब प्यार में बदल गई, पता नहीं चला। दोनों सेट पर एक दूसरे को निक नेम से पुकारने लगे और आलम ये रहा कि दोनों के रोमांटिक सीन भी असली लगने लगे। सेट से शुरू हुई प्रेम कहानी काफी साल चली, लेकिन सुरैया का रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार इस रिश्ते के विरोध में था, खासकर उनकी नानी।

कहा जाता है कि सुरैया को देव आनंद से दूर करने के लिए नानी सेट पर आया करती थीं और दोनों के रोमांटिक सीन्स को भी कम करने के लिए कहती थीं। देव आनंद ने सुरैया के लिए 3,000 रुपए की हीरे की अंगूठी खरीदने के लिए दोस्तों से पैसे उधार लिए थे, हालांकि उनके रिश्ते को सुरैया के रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार से कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। इसलिए दोनों ने आपसी समझ से रिश्ते को खत्म करना सही समझा।

कहा जाता है कि जब सुरैया और देव आनंद की आखिरी मुलाकात हुई थी, तब दोनों घंटे गले लगकर रोए थे और देव आनंद साहब की अंगूठी को अभिनेत्री ने समंदर में फेंक दिया था। देव आनंद से रिश्ता टूटने के बाद सुरैया ने सारी उम्र तन्हा काट दी।

–आईएएनएस

पीएस/वीसी


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