तनाव दूर कर मांसपेशियों को मजबूत बनाता है प्रसारित पादहस्तासन, ये सावधानी भी जरूरी


नई दिल्ली, 31 जनवरी (आईएएनएस)। शारीरिक हो या मानसिक हर समस्या का समाधान योगासन में छिपा है। तन और मन दोनों को सेहतमंद रखने वाले ऐसे ही एक आसन का नाम प्रसारित पादहस्तासन या प्रसारित पादोत्तानासन है, जिसे वाइड-लेग्ड फॉरवर्ड बेंड भी कहा जाता है।

यह आसन पैरों को फैलाकर आगे झुकने से शरीर की कई मांसपेशियों को गहरा खिंचाव देता है और मन को शांत करता है। योग विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित अभ्यास से लचीलापन बढ़ता है, तनाव कम करता है और पूरा शरीर सेहतमंद रहता है।

मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के अनुसार, प्रसारित पादहस्तासन अभ्यास के लिए योग मैट पर ताड़ासन पोज में सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैर जोड़कर, हाथ शरीर के साथ रखें। सांस अंदर लें और पैरों को 3-4 फीट (या अपनी ऊंचाई के अनुसार 4-5 फीट) दूर फैलाएं। पैर समानांतर रखें, एड़ियां बाहर की ओर और पैर के अंगूठे थोड़े अंदर की ओर रखें। इस दौरान हाथों को कमर पर रखें। छाती को आगे की ओर रखें। सांस छोड़ते हुए कमर से आगे झुकें। इस दौरान सांस अंदर लें और धीरे से वापस आएं।

प्रसारित पादहस्तासन के अभ्यास से शरीर को कई लाभ मिलते हैं। जांघों, कूल्हों और पीठ में गहरा खिंचाव मिलता है, जिससे लचीलापन बढ़ता है। रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है, पीठ दर्द में राहत मिलती है। पाचन क्रिया सुधरती है और कब्ज दूर होता है।

मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ता है, तनाव, चिंता में लाभ मिलता है। पैर, टखने और कोर मसल्स मजबूत होते हैं। साथ ही थकान दूर होती है, मन शांत रहता है और ऊर्जा बढ़ती है।

प्रसारित पादहस्तासन अभ्यास के दौरान सावधानियां भी जरूरी हैं। पीठ में गंभीर चोट, हाई या लो ब्लड प्रेशर, ग्लूकोमा, घुटने/कूल्हे की समस्या वाले लोग बिना योग विशेषज्ञ की सलाह के न करें। गर्भवती महिलाएं भी ध्यान रखें। यह आसन सुबह खाली पेट करने से अधिक फायदेमंद होता है।

–आईएएनएस

एमटी/एएस


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