भारत-ईयू के बीच एफटीए एक-दूसरे पर निर्भरता का मुकाबला करने की 'रणनीति'


नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। भारत-यूरोपीय यूनियन फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (एफटीए) को लेकर काफी चर्चा हो रही है। यकीनन इस डील को ‘मदर्स ऑफ ऑल डील’ कहा जा रहा है। इसे लेकर विशेषज्ञों की अलग-अलग राय है। पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों में भी एफटीए के असर को लेकर चर्चा हो रही है।

यूरोन्यूज के मुताबिक, बड़ी शक्तियां टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करके सप्लाई चेन से जुड़ी निर्भरता पर एकाधिकार जमाना चाहती हैं। इस स्थिति में भारत-ईयू एफटीए एक-दूसरे पर निर्भरता के दौर में बातचीत की शर्तों पर खुलेपन का संकेत देता है। ट्रंप के टैरिफ वाले खेल के बीच ग्लोब्ल डायनेमिक्स तेजी से बदल रहा है।

यूरोन्यूज रिपोर्ट के अनुसार, जब बड़ी ताकतें तेजी से टैरिफ को हथियार बना रही हैं और सप्लाई-चेन पर निर्भरता का फायदा उठा रही हैं, ऐसे में यह डील टैरिफ से कहीं आगे की बात है।

यह समझौता इस बात को दर्शाता है कि दुनिया के तमाम ताकतवर देशों को अपने मूल्यों को छोड़े बिना एकजुटता के साथ मजबूती बनानी चाहिए।

रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत के लिए, यह समझौता इस बात का संकेत है कि वह अपनी राजनीतिक विचारधारा को छोड़े बिना एक टॉप-टियर मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस पावर बनने के बारे में गंभीरता दिखा रहा है।”

यूरोप चाहता है कि यह समझौता सिर्फ एक हेडलाइन से ज्यादा हो, तो उसे समझौते की प्रगति को मार्केट एक्सेस, एनर्जी और इंडस्ट्री में टॉप ट्रांजिशन चुनौतियों पर सहयोग के साथ ही टेक और सप्लाई-चेन साझेदारी की दिशा में कदमों के लिए मापे जा सकने वाले माइलस्टोन के साथ देखना होगा।

रिपोर्ट में यह भी याद दिलाया गया, “एक एफटीए सिर्फ फ्रेमवर्क तय कर सकता है और कंपनी लेवल पर मुख्य जियो-इकोनॉमिक इंडस्ट्रीज में सहयोग बनाना बहुत जरूरी है।”

एफटीए ने भारत के लिए ईयू के 97 फीसदी सामान एक्सपोर्ट पर टैरिफ कम कर दिया या खत्म कर दिया और वैल्यू के हिसाब से 99 फीसदी भारतीय एक्सपोर्ट के लिए तरजीह वाला एक्सेस दिया।

रिपोर्ट में कहा गया कि रियायतें मान ली गईं, जिसके अनुसार, यूरोपीय कार टैरिफ 40 फीसदी पर रहेगा, जबकि भारत जरूरी इंडस्ट्रियल सामानों पर ड्यूटी को धीरे-धीरे खत्म करने पर सहमत हुआ।

रिपोर्ट में कहा गया है कि यूरोप पर आर्थिक रिश्तों को अलग-अलग तरह का बनाने का बहुत ज्यादा दबाव है और एफटीए एक ​​अच्छी शुरुआत है, जो ज्यादा रणनीतिक साझेदारी का साल बन सकता है।

बता दें, भारत-ईयू व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) पहले से ही सेमीकंडक्टर और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की इंटरऑपरेबिलिटी जैसे दूसरे क्षेत्रों में काम को आगे बढ़ा रही है। एफटीए को भरोसेमंद सप्लायर इकोसिस्टम और जॉइंट आरएंडडी पाथवे को चालू करने वाला बताया गया।

हाल में एक रिपोर्ट सामने आई थी कि ईयू तकनीकी और डिजिटल निर्भरता को अमेरिका से अलग करना चाहता है। एसे में यह एआई और भरोसेमंद डेटा शेयरिंग पर करीबी सहयोग, एआई के लिए अमेरिका और चीन दोनों के दबदबे वाले तरीकों के विकल्प बनाने में मदद कर सकता है।

–आईएएनएस

केके/एबीएम


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