'मझवार' को अनुसूचित जाति का दर्जा दिलाने पर अड़े संजय निषाद, आंदोलन की चेतावनी


लखनऊ, 30 जनवरी (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने निषाद समाज को ओबीसी श्रेणी से हटाकर अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल करने की मांग को एक बार फिर उठाया है। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा भारतीय जनता पार्टी के एजेंडे में शामिल है और संविधान में भी निषाद समुदाय को मूल रूप से अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज किया गया है, लेकिन बाद में इसे गलत तरीके से ओबीसी श्रेणी में डाल दिया गया।

मंत्री संजय निषाद ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सांसद रहते हुए भी इस विषय को कई बार उठाया है। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि सामाजिक न्याय मंत्री ने भी इस पर अपनी सहमति जताई है।

संजय निषाद ने कहा, “संवैधानिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल की भूमिका अहम होती है। मैंने इस विषय पर पत्र लिखा था, जिसके बाद भारत के महापंजीयक (आरजीआई) को भी पत्र भेजा गया। आरजीआई ने स्पष्ट किया कि अब तक अनुसूचित जाति की सूची में ‘मझवार’ शामिल है।”

उन्होंने बताया कि सरकार को निर्देश जारी करने चाहिए कि 1969 के सेक्शन मैनुअल के आधार पर निषाद समाज को भी अनुसूचित जाति में गिना जाए और उनसे कोई अतिरिक्त दस्तावेज न मांगे जाएं। मंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने 26 जून 2025 को एक अधिसूचना जारी की थी, जिसमें 53 नंबर पर मझवार को अनुसूचित जाति के रूप में दर्ज किया गया है।

संजय निषाद ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने बेईमानी से मझवार समाज को ओबीसी में डाल दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अधिकारी इस मांग को नहीं मानते, तो मझवार समाज यूजीसी नियमों की तरह सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेगा। उन्होंने साफ कहा कि मझवार समाज को ओबीसी से हटाकर अनुसूचित जाति का प्रमाणपत्र जारी किया जाए और उनकी गिनती भी एससी वर्ग में की जाए।

उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास 11 विधायक हैं और वे सभी से कहेंगे कि अगर उन्हें अगली बार विधायक बनना है तो निषाद समाज की आवाज मजबूती से उठानी होगी।

दूसरी ओर केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री संजय निषाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा, “मोदी है तो मुमकिन है। उन्होंने डूबती हुई अर्थव्यवस्था को नई पहचान दी है। आज जब बड़े-बड़े विकसित देशों की अर्थव्यवस्था कमजोर हो रही है, भारत आगे बढ़ रहा है। संकट के समय में विकास करना बड़ी उपलब्धि है।”

–आईएएनएस

वीकेयू/वीसी


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