अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता बेहतर हुई, एनपीए रिकवरी दर करीब दोगुनी हुई


नई दिल्ली, 29 जनवरी (आईएएनएस)। देश में अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों (एससीबी) की परिसंपत्ति गुणवत्ता बेहतर हुई है। कुल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात (जीएनपीए) और कुल एनपीए अनुपात क्रमशः कई दशकों की निम्न सीमा और रिकॉर्ड निम्न सीमा पर पहुंच गए हैं। यह जानकारी आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की ओर से गुरुवार को दी गई।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया गया कि एससीबी में एनपीए की रिकवरी दर वित्त वर्ष 2018 के 13.2 प्रतिशत से दोगुनी बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 26.2 प्रतिशत हो गई। दिवालिया और दिवालियापन संहिता 2016 (आईबीसी कोड) के माध्यम से रिकवरी दर बेहतर हुई है।

वहीं, सितंबर, 2025 तक एससीबी का पूंजी-जोखिम-भारित परिसंपत्ति अनुपात (सीआरएआर) 17.2 प्रतिशत पर मजबूत बना हुआ है।

आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया गया कि सरकार की पहलों के कारण देश में क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों के प्रदर्शन में काफी सुधार देखा गया है। इन पहलों में क राज्य-एक आरआरबी सिद्धांत के आधार पर ग्रामीण बैंकों का चार चरणों में समेकन शामिल है। इससे आरआरबी संख्या 1 मई, 2025 तक 196 से घटकर 28 रह गई है।

इन उपायों के कारण आरआरबी के प्रदर्शन में सुधार हुआ है। हाल के वर्षों में आरआरबी की वित्तीय स्थिति बेहतर हुई है। वित्त वर्ष 2024 के दौरान ग्रामीण बैंकों ने 7.6 हजार करोड़ का रिकॉर्ड समेकित कुल लाभ हासिल किया। इसके बाद वित्त वर्ष 2025 में 6.8 हजार करोड़ का दूसरा सबसे अधिक समेकित कुल लाभ हासिल किया।

इसके अतिरिक्त, आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में बताया गया कि पिछले दशक में लघु वित्त क्षेत्र में निरंतर वृद्धि हुई है। जहां सक्रिय ऋण प्राप्तकर्ताओं की संख्या वित्त वर्ष 2014 के 330 लाख से दोगुनी बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 627 लाख हो गई है। इस अवधि के दौरान एमएफआई के सकल ऋण में लगभग 7 गुनी वृद्धि हुई जो वित्त वर्ष 2014 के 33,517 करोड़ रुपए से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 2,38,198 करोड़ रुपए हो गया। इसी अवधि के दौरान एमएफआई शाखा नेटवर्क 11,687 शाखाओं से बढ़कर 37,380 हो गया।

–आईएएनएस

एबीएस/


Show More
Back to top button