झारखंड सूचना आयोग 5 साल से ठप: सरकार बोली- चार हफ्ते में कार्यशील हो जाएगा आयोग


रांची, 29 जनवरी (आईएएनएस)। झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट को आश्वस्त किया है कि राज्य सूचना आयोग चार हफ्ते के अंदर कार्यशील कर दिया जाएगा। बीरेंद्र सिंह नामक एक शख्स की अपील याचिका पर जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और न्यायमूर्ति एके राय की खंडपीठ में गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजीव रंजन ने बताया कि राज्य सरकार आयोग को शीघ्र सक्रिय करने की दिशा में कार्रवाई कर रही है और चार सप्ताह में आयोग पूरी तरह कार्यरत हो जाएगा।

सुनवाई के दौरान राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार और कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के सचिव भी अदालत में उपस्थित हुए। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने यह चेतावनी दी थी कि यदि आयोग को जल्द सक्रिय नहीं किया गया, तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है। इसी क्रम में मुख्य सचिव और कार्मिक सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था।

कोर्ट ने कहा कि इससे पहले 12 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार को सूचना आयोग को सक्रिय करने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी। अदालत ने गुरुवार को राज्य सरकार का पक्ष सुनने के बाद चार हफ्ते का समय प्रदान किया है। सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से बताया गया था कि राज्य सूचना आयोग पिछले लगभग पांच वर्षों से निष्क्रिय है।

मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्त के सभी पद रिक्त पड़े हैं। इस कारण सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत द्वितीय अपील का कोई मंच उपलब्ध नहीं है। इससे आम नागरिकों को परेशानी हो रही है और उन्हें मजबूरी में हाईकोर्ट का रुख करना पड़ रहा है, जिससे अदालत पर मामलों का अनावश्यक बोझ बढ़ रहा है। मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता विकास कुमार ने पक्ष रखा।

अपीलकर्ता बीरेंद्र सिंह ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत कुछ जानकारियां मांगी थीं। तय 30 दिनों की अवधि में जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने प्रथम अपील दायर की, लेकिन इसके बाद भी संबंधित विभाग ने सूचना उपलब्ध नहीं कराई। आमतौर पर ऐसी स्थिति में द्वितीय अपील राज्य सूचना आयोग के समक्ष दायर की जाती है, लेकिन आयोग में अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने के कारण वह लंबे समय से निष्क्रिय है। इसी कारण अपीलकर्ता ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

–आईएएनएस

एसएनसी/पीएसके


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