बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक : सीपीआई ने कई मुद्दों पर उठाई गंभीर चिंताएं


नई दिल्ली, 27 जनवरी (आईएएनएस)। संसद के बजट सत्र से पहले मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक हुई। इस बैठक में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई) का प्रतिनिधित्व राज्यसभा सांसद पी. संतोष कुमार ने किया। उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनीतिक, आर्थिक और लोकतांत्रिक मुद्दों को उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया।

सीपीआई ने केरल के लिए विशेष वित्तीय पैकेज की मांग की। पार्टी का कहना है कि केंद्र द्वारा लगाए गए उधार प्रतिबंधों के कारण राज्य को इस वित्तीय वर्ष में 21,000 करोड़ रुपए से ज्यादा का संसाधन घाटा हो रहा है। केरल जैसे राज्यों को हो रहे असाधारण वित्तीय संकट को दूर करने के लिए तुरंत केंद्र सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए।

विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर सीपीआई ने गहरी चिंता जताई। पी. संतोष कुमार ने कहा कि यह प्रक्रिया अब “विशेष गहन निष्कासन” में बदल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि लोकतंत्र में मतदाता शासकों को चुनते हैं। लेकिन, यहां उल्टा हो रहा है, जहां शासक मतदाताओं को चुन रहे हैं। चुनाव आयोग तेजी से उन्मूलन आयोग बनता जा रहा है।

आंतरिक सुरक्षा के मुद्दे पर पार्टी ने ऑपरेशन कगार की आलोचना की। सीपीआई का आरोप है कि इस ऑपरेशन के नाम पर निर्दोष आदिवासियों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि सरकार संसद और जनता के सामने इस ऑपरेशन का पूरा विवरण और वर्तमान स्थिति रखे ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

विदेश नीति पर सीपीआई ने कहा कि भारत का रुख पूरी तरह कमजोर हो गया है। डोनाल्ड ट्रंप के धमकी भरे रवैये, वेनेजुएला की स्थिति या ग्रीनलैंड से जुड़े मुद्दों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं है। इससे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की परंपरा कमजोर हो रही है।

पार्टी ने आशा कार्यकर्ताओं के वेतन में तुरंत बढ़ोतरी की मांग दोहराई, जैसा कि पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आश्वासन दिया था। मनरेगा को तुरंत बहाल करने की भी मांग की गई। सीपीआई का कहना है कि वेतन भुगतान में देरी, कम आवंटन और काम के दिनों में कमी से ग्रामीण आजीविका बुरी तरह प्रभावित हो रही है। मनरेगा कृषि संकट और बेरोजगारी के समय में महत्वपूर्ण रोजगार योजना है, इसे विस्तार और पूरा वित्त पोषण मिलना चाहिए।

इसके अलावा, सीपीआई ने मजदूर विरोधी लेबर कोड्स वापस लेने, किसान विरोधी बीज बिल का विरोध करने और केंद्र प्रायोजित योजनाओं में केंद्र का हिस्सा 75:25 करने की मांग की, ताकि राज्य बेहतर ढंग से कल्याण कार्यक्रम चला सकें। सीपीआई ने जोर दिया कि लोकतंत्र, संघवाद और लोगों की आजीविका की सुरक्षा के लिए बजट सत्र में इन मुद्दों पर गंभीर ध्यान दिया जाना चाहिए।

–आईएएनएस

एसएचके/एबीएम


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