डॉ. एसजी सुशीलम्मा को पद्म सम्मान, कहा- यह सफर केवल 15 रुपए, एक दोस्त और तीन बच्चों के साथ शुरू हुआ था

बेंगलुरु, 26 जनवरी (आईएएनएस)। पद्म पुरस्कार से सम्मानित डॉ. एसजी सुशीलम्मा ने जीवन की संघर्षपूर्ण यात्रा और समाज सेवा के संकल्प को साझा करते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद भावुक और संतोष देने वाला पल है।
एसजी सुशीलम्मा ने आईएएनएस से बताया कि जब उन्हें इस पुरस्कार की खबर मिली तो पहले विश्वास ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “मुझे पहले से कुछ पता नहीं था। जब समाचार आया, तो मैंने सबसे पहले भगवान का धन्यवाद किया। यह मेरे लिए बहुत खुशी का क्षण है।”
सुशीलम्मा ने अपनी 50 साल पुरानी यात्रा को याद करते हुए बताया कि यह सफर केवल 15 रुपए, एक दोस्त और तीन बच्चों के साथ शुरू हुआ था। आज वह खुद को ‘हजारों की मां’ मानती हैं। समाज के लोगों से मिलने वाला प्यार और सम्मान उन्हें अंदर से बहुत संतोष देता है। लोग मेरे पास आकर बधाई देते हैं, आशीर्वाद लेते हैं, यह सब देखकर दिल खुश हो जाता है। यह एक नई शुरुआत जैसा लगता है।
उन्होंने देश के युवाओं से अपील करते हुए कहा कि उन्हें रोजगार और समाज सेवा के क्षेत्र में आगे आना चाहिए। भारत को आगे बढ़ाने के लिए युवाओं की भूमिका सबसे अहम है। साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की भी सराहना की और कहा कि एक आदिवासी महिला को देश का राष्ट्रपति बनाना गर्व की बात है और यह देश के लिए एक बड़ा संदेश है।
डॉ. सुशीलम्मा ने आदिवासी समुदाय के लिए किए जा रहे अपने कार्यों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मौगड़ी और बांदीपुर जैसे क्षेत्रों में आदिवासियों की मदद के लिए उन्होंने योजनाएं शुरू की हैं। मौगड़ी में उनका काम 50 प्रतिशत पूरा हो चुका है और बाकी 50 प्रतिशत पर भी तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य है कि आदिवासियों को घर और रोजगार दोनों मिलें।
उन्होंने अपने सपने को साझा करते हुए कहा कि वह ऐसा भारत देखना चाहती हैं, जहां कोई भी गरीब न हो, सभी को घर, भोजन, स्वास्थ्य और शिक्षा मिले। अगर सब लोग बराबरी के स्तर पर आएंगे, तभी देश सच में आगे बढ़ेगा।
डॉ. सुशीलम्मा ने समाज के संपन्न लोगों से भी अपील की कि जिनके पास अच्छे साधन और पैसा है, वे जरूरतमंदों की मदद करें। अगर हर व्यक्ति एक-दूसरे की मदद करे, तो समाज खुद-ब-खुद मजबूत बन जाएगा।
–आईएएनएस
वीकेयू/एबीएम