बांग्लादेश के समर्थन में आईसीसी से पंगा लेने पर पाकिस्तान क्रिकेट बर्बाद हो सकती है


नई दिल्ली, 26 जनवरी (आईएएनएस)। टी20 विश्व कप 2026 से पहले पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) और बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) की जुगलबंदी दोनों देशों के क्रिकेट पर भारी पड़ने वाली है। बांग्लादेश क्रिकेट टीम तो टी20 विश्व कप से बाहर हो चुकी है। बीसीबी को इसका बड़ा आर्थिक नुकसान होना तय है। भविष्य में आईसीसी बीसीबी पर कई कड़े प्रतिबंध भी लगा सकती है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) को बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड का समर्थन करने, उसके पक्ष में बयान देने का बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है।

दरअसल, पिछले कुछ समय में भारत और बांग्लादेश के बीच आपसी संबंध लगातार खराब हुए हैं। बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। इन घटनाओं ने भारत और बांग्लादेश के रिश्तों के बीच कटुता पैदा की है। वहीं भारत से जैसे-जैसे बांग्लादेश के संबंध खराब हुए हैं, पाकिस्तान के साथ ठीक वैसे ही उसकी निकटता बढ़ी है। इस निकटता को पाकिस्तान-बांग्लादेश क्रिकेट के क्षेत्र में वर्चस्व बढ़ाने के तौर पर देख रहे हैं। यही वजह है कि बीसीबी-बीसीसीआई-आईसीसी के बीच चल रहे विवाद में पीसीबी बिना बुलाए मेहमान की तरह आया है और बीसीबी के पक्ष में अपने बयानों से अपने लिए मुसीबत बढ़ा रहा है।

बांग्लादेश में हिंदूओं के खिलाफ हो रही हिंसा का भारत में भारी विरोध हुआ। विरोध करने वाले संगठन आईपीएल 2026 से बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को बाहर करने की मांग कर रहे थे। बीसीसीआई से निर्देश मिलने के बाद केकेआर ने मुस्तफिजुर रहमान को रिलीज कर दिया। इसे बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और वहां की सरकार ने गलत तरीके से लिया। बांग्लादेश में आईपीएल का प्रसारण बैन करने का निर्णय लिया गया। साथ ही बीसीबी ने अपनी टीम को विश्व कप मैचों के लिए भारत न भेजने का निर्णय लिया। बीसीबी ने आईसीसी से अपने मैच श्रीलंका में शिफ्ट करने या फिर अपना ग्रुप बदलने की मांग की जिसे आईसीसी ने खारिज कर दिया।

इसे पूरे प्रकरण में पाकिस्तान का कहीं रोल नहीं है। पाकिस्तान के टी20 विश्व कप 2026 के मैच पहले से ही श्रीलंका में शेड्यूल किए गए हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान ने बांग्लादेश को भारत न आने के उनके स्टैंड पर डटे रहने की सलाह दी और अपने सहयोग का भरोसा दिया। आईसीसी के बोर्ड सदस्यों की बैठक में बांग्लादेश के समर्थन में वोट करने वाला एकमात्र देश भी पाकिस्तान ही था। पाकिस्तान ने आईसीसी को मेल भी किया कि उसके आयोजन स्थल भारत से हटाकर श्रीलंका में कर दिए जाएं।

आईसीसी ने बांग्लादेश का अनुरोध नहीं माना और उनके खिलाड़ियों की सुरक्षा की गारंटी लेते हुए उन्हें भारत जाकर विश्व कप के मैच खेलने की सलाह दी। बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड नहीं माना और अपनी सरकार की सलाह पर विश्व कप से बाहर हो गया है। उसकी जगह आईसीसी ने स्कॉटलैंड को जगह दी है।

बांग्लादेश के विश्व कप से बाहर होने को पीसीबी ने गलत बताया है। पीसीबी का मानना है कि अगर उनके लिए हाइब्रिड मॉडल की व्यवस्था हो सकती है, तो फिर बांग्लादेश के लिए क्यों नहीं? टी20 विश्व कप 2026 की टीम घोषित होने के बाद भी पाकिस्तान ने बांग्लादेश के समर्थन में विश्व कप से बाहर होने की धमकी दी है। पीसीबी के अध्यक्ष मोहसिन नकवी का कहना है कि पाकिस्तान विश्व कप में हिस्सा लेगा या नहीं, इसका फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ करेंगे। संभवत: सोमवार या मंगलवार तक विश्व कप में शामिल होने या न होने पर पाकिस्तान की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

दरअसल, पाकिस्तान बांग्लादेश के कंधे पर बंदूक रखकर चलाने की कोशिश कर रहा है और बीसीसीआई के साथ ही आईसीसी के लिए मुसीबत खड़ी करने की कोशिश कर रहा है। इसकी मुख्य वजह आईसीसी अध्यक्ष जय शाह का भारतीय होना है।

बीसीसीआई और आईसीसी के विरोध की कोशिश में पाकिस्तान जो भी कर रहा है, उससे उसके क्रिकेट को बड़ा नुकसान पहुंच सकता है। आईसीसी में भी बीसीसीआई के सामने पाकिस्तान की ताकत बेहद कमजोर है। इसका पता आईसीसी में बोर्ड सदस्यों की हाल में हुई वोटिंग में दिखा जब बांग्लादेश और पाकिस्तान को किसी भी देश का समर्थन नहीं मिला। पाकिस्तान के लिए बीसीबी के कंधे पर बंदूक रखकर बीसीसीआई और आईसीसी से पंगा लेना बहुत महंगा पड़ सकता है।

अगर पाकिस्तान विश्व कप से बाहर हुआ तो उसकी जगह युगांडा को मौका दिया जा सकता है। इसके बाद आईसीसी पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड पर कड़े प्रतिबंध लगा सकती है। इसमें आईसीसी, एसीसी प्रतियोगिताओं से बैन करना, द्विपक्षीय सीरीज की अनुमति न देना, और पीएसएल के लिए विदेशी खिलाड़ियों को एनओसी न देना सहित कुछ आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो पाकिस्तान क्रिकेट बर्बाद हो सकता है। इसलिए पाकिस्तान के लिए भलाई इसी में है कि बीसीबी का समर्थन बंद कर चुपचाप विश्व कप खेले।

–आईएएनएस

पीएके


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