मिस्र आने वाले वर्षों में भारत के साथ व्यापार को दोगुना करेगा


नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। मिस्र आने वाले वर्षों में भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करके 12 अरब डॉलर तक ले जाने की तैयारी कर रहा है। मौजूदा समय में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार दो अरब डॉलर के करीब है।

राष्ट्रीय राजधानी में फॉरेन कॉरस्पॉडेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में बोलते हुए, भारत में मिस्र के राजदूत, कामेल जायद गलाल ने कहा कि दोनों देशों के पास खासकर ऊर्जा, विनिर्माण, कृषि और कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में एक साथ विकास करने के कई अवसर हैं।

उन्होंने आगे कहा कि मिस्र में भारतीय निवेश, जो वर्तमान में लगभग 3.7 अरब डॉलर है, भविष्य में 10 अरब डॉलर से अधिक होने की उम्मीद है।

राजदूत ने भारतीय कंपनियों को मिस्र को केवल अल्पकालिक व्यापारिक गंतव्य के बजाय दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देखने के लिए आग्रह किया।

गलाल ने आगे कहा कि ऊर्जा एक ऐसा क्षेत्र है। जहां दोनों आसानी से बड़े पैमाने पर सहयोग कर सकते हैं।

गलाल ने बताया कि मिस्र के पास सौर और पवन ऊर्जा के प्रचुर संसाधन हैं, साथ ही विकसित हो रहा बुनियादी ढांचा और प्रमुख वैश्विक समुद्री मार्गों तक आसान पहुंच है।

इन कारणों से मिस्र हरित ऊर्जा उत्पादन और निर्यात का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है। उन्होंने उर्वरक, कृषि और औद्योगिक विनिर्माण क्षेत्रों में भी दोनों देशों के मजबूत सहयोग की आशा व्यक्त की।

गलाल ने मिस्र के औद्योगिक क्षेत्रों और अफ्रीकी और यूरोपीय देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौतों के फायदे के बारे में भारतीय व्यवसायियों को बताया।

उन्होंने कहा कि मिस्र सिर्फ उत्पादों की बिक्री का बाजार नहीं है, बल्कि व्यापक क्षेत्रों में उत्पादन और निर्यात का आधार भी है।

लाल सागर और भूमध्य सागर पर स्थित मिस्र के बंदरगाह, साथ ही स्वेज नहर (जो वैश्विक व्यापार का लगभग 12 प्रतिशत संभालती है) इसे एक महत्वपूर्ण वैश्विक व्यापार प्रवेश द्वार बनाते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी के बीच हुई मुलाकातों के बाद, भारत और मिस्र ने 2023 में अपने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक आगे बढ़ाया है।

गलाल के अनुसार, अब ध्यान कागजी संबंधों को मजबूत करने से हटकर वास्तविक आर्थिक परिणाम देने पर केंद्रित हो गया है।

मिस्र की विदेश नीति के बारे में बात करते हुए, राजदूत ने कहा कि देश रणनीतिक स्वतंत्रता, कई देशों के बीच सहयोग और राष्ट्रीय संप्रभुता के सम्मान का समर्थन करता है। यह कठोर राजनीतिक गुटों से दूर रहता है और मानता है कि यह दृष्टिकोण भारत के विचारों से काफी मिलता-जुलता है।।

–आईएएनएस

एबीएस/


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