दिल्ली पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों से वाहन बेचने वाले गिरोह को किया बेनकाब, फरार आरोपी गिरफ्तार


नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की चौकी/पुलिस पोस्ट सेक्टर-10 द्वारका की टीम ने 2023–24 में एक पूर्व सैनिक के साथ हुए गंभीर धोखाधड़ी के मामले को सुलझा लिया है। पुलिस ने इस कार्रवाई में फर्जी दस्तावेजों के सहारे लोनग्रस्त वाहनों की खरीद-बिक्री करने वाले संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है।

दिल्ली पुलिस की टीम ने 1200 किलोमीटर से अधिक का पीछा करते हुए उत्तर प्रदेश के पीलीभीत टाइगर रिजर्व के आसपास शिवालिक रेंज की तलहटी में लगातार छापेमारी की। इस दौरान टीम ने जंगली इलाकों में मोबाइल नेटवर्क की अनुपस्थिति, उफनती नहरों और बाघों के खतरे के बीच रातभर अभियान चलाया। आखिरकार 4 जनवरी की तड़के करीब 3:45 बजे नेपाल सीमा के पास ग्राम भोपालपुर, साकरिया, थाना गजरौला (पीलीभीत) में एक फार्म से कुख्यात आरोपी हरदीप सिंह रंधावा को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार आरोपी हरदीप सिंह रंधावा उत्तर प्रदेश पुलिस को पिछले तीन वर्षों से वांछित था। उसके खिलाफ हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट सहित गंभीर धाराओं में चार से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। कानून से बचने के लिए उसने पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश तक सात से अधिक ठिकाने बदलते हुए पीलीभीत-बरेली क्षेत्र में शरण ली थी।

यह मामला 24 जनवरी 2025 को थाना द्वारका साउथ में दर्ज एफआईआर संख्या 86/2025 से जुड़ा है। शिकायतकर्ता संजीव कुमार, जो एक सेवानिवृत्त सैनिक के पुत्र हैं, सेकेंड हैंड कार के व्यवसाय से जुड़े हैं। 8 फरवरी 2023 को एक व्यक्ति ने स्वयं को हरप्रीत सिंह रंधावा बताकर इनोवा क्रिस्टा बेचने की पेशकश की। अगले दिन वह अपने कथित भाई हरदीप सिंह रंधावा के साथ कार लेकर आया और 14.50 लाख रुपए में सौदा तय हुआ। अधिकांश भुगतान नकद व बैंक ट्रांसफर के जरिए किया गया।

बाद में कार पंजाब के एक खरीदार को बेची गई, लेकिन 29 मई 2023 को खुलासा हुआ कि वाहन पर पहले मालिक असलम खान के नाम बैंक लोन लंबित है। आरोपी फरार हो गए। 21 सितंबर 2024 को पंजाब पुलिस ने इसी मामले में शिकायतकर्ता और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया, जिन्हें करीब 70 दिन जेल में रहना पड़ा। अंततः पीड़ित परिवार को भारी रकम चुकाकर समझौता करना पड़ा।

जांच में सामने आया कि वाहन की खरीद फर्जी आधार कार्ड और नकली फोटो के जरिए की गई थी। असली मालिक असलम खान ने भी बरेली में अलग एफआईआर दर्ज कराई थी। पूछताछ में हरदीप ने खुलासा किया कि उसका साथी सतेन्द्र पाल सिंह (जिसने हरप्रीत सिंह रंधावा बनकर पहचान छिपाई) इस पूरे रैकेट का मास्टरमाइंड है। दोनों ने मिलकर फर्जी बैंक एनओसी तैयार की, आरटीओ रिकॉर्ड में लोन क्लियर दिखाया और वाहन को धोखाधड़ी से बेच दिया।

मुख्य साजिशकर्ता सतेन्द्र पाल सिंह अब भी फरार है। उसके खिलाफ बरेली और पीलीभीत जिलों में हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी, आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं और गैर-जमानती वारंट जारी हैं। इस मामले को सुलझाने में चौकी प्रभारी सेक्टर-10 द्वारका एसआई रजत मलिक, एएसआई संजीव कुमार, एचसी शैतान सिंह की अहम भूमिका रही। कार्रवाई एसएचओ द्वारका साउथ इंस्पेक्टर राजेश कुमार साह, एसीपी द्वारका किशोर कुमार रेवाला और डीसीपी द्वारका जिला अंकित सिंह (आईपीएस) के निर्देशन में की गई।

–आईएएनएस

पीएसके


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