चेतेश्वर पुजारा: टी20 के दौर में टेस्ट क्रिकेट के प्रति समर्पण ने दी अलग पहचान

नई दिल्ली, 24 जनवरी (आईएएनएस)। जमाने से विपरीत चलना हमेशा मुश्किल होता है। आप अकेले होते हैं और संघर्ष के साथ सफलता की राह भी आपको खुद ढूंढनी होती है। चेतेश्वर पुजारा की कहानी कुछ ऐसी ही है।
फटाफट क्रिकेट के दौर में अपनी धैर्यपूर्ण बल्लेबाजी से पुजारा ने न सिर्फ टेस्ट क्रिकेट में बड़ी सफलता हासिल की बल्कि एक दशक तक इस फॉर्मेट में भारत की सबसे मजबूत कड़ी रहे। पुजारा को उनकी मजबूत मनोदशा और क्रीज पर लंबा समय गुजारने की क्षमता की वजह से राहुल द्रविड़ के बाद दूसरा ‘द वॉल’ कहा गया।
25 जनवरी 1988 को गुजरात के राजकोट में जन्मे चेतेश्वर पुजारा को क्रिकेटर बनाने में सबसे बड़ा योगदान उनके पिता अरविंद पुजारा का है। अरविंद खुद भी एक प्रथम श्रेणी क्रिकेटर और कोच रहे। देश के लिए खेलने की उनकी इच्छा कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन अपने बेटे के माध्यम से उनकी आंखों ने इस सपने को पूरा होते देखा।
बचपन से क्रिकेट को अपना लेने वाले पुजारा ने सौराष्ट्र की तरफ से घरेलू क्रिकेट खेला। सौराष्ट्र के लिए प्रथम श्रेणी में 2005 में उन्होंने डेब्यू किया था। 5 साल तक घरेलू क्रिकेट में लगातार अच्छे प्रदर्शन के बाद पुजारा को 2010 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ भारत की तरफ से टेस्ट में डेब्यू का मौका मिला। यह वह दौर था जब राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण जैसे टेस्ट क्रिकेट के दिग्गज अपने करियर के आखिरी चरण में थे। भारत को इन दोनों बल्लेबाजों के विकल्प की तलाश थी। पुजारा ने मजबूती से अपनी जगह बनाई और धीरे-धीरे वह टेस्ट टीम के नियमित और भरोसेमंद सदस्य बन गए।
2010 से 2023 के बीच पुजारा ने देश और विदेश में भारतीय टीम को टेस्ट फॉर्मेट में मिली सफलता में बड़ी भूमिका निभाई। ऑस्ट्रेलिया दौरे पर 2018-19 की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज में पुजारा ने जो प्रदर्शन किया, वह हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने चार टेस्ट मैचों में 521 रन बनाए और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजी आक्रमण को लंबे समय तक काबू में रखा। इस प्रदर्शन ने भारत की पहली बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी जीत में निर्णायक भूमिका निभाई।
नवंबर 2012 में अहमदाबाद में इंग्लैंड के खिलाफ 206 रन की पारी, दिसंबर 2013 में जोहानसबर्ग में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 153 रन की पारी, 2017 में रांची में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 525 गेंदों पर खेली गई 202 रन की पारी, दिसंबर 2018 में एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 123 और 71 रन की पारी, और 2021 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में 77 और ब्रिसबेन में 56 रन की पारी पुजारा के करियर की सर्वश्रेष्ठ पारियों में मानी जाती है।
पुजारा ने अपने करियर में 103 टेस्ट मैचों की 176 पारियों में 19 शतक और 35 अर्धशतक की मदद से 7,195 रन बनाए। उनका औसत 43.60 रहा और सर्वाधिक स्कोर नाबाद 206 रन रहा। पुजारा ने काउंटी क्रिकेट में भी बड़ी सफलता हासिल की।
24 अगस्त 2025 को पुजारा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह दिया था। टी20 क्रिकेट के दौर में टेस्ट क्रिकेट के प्रति अपने समर्पण के लिए पुजारा को हमेशा याद किया जाएगा।
–आईएएनएस
पीएके