'डिजिटल इंडिया' की दिशा में सरकार की बड़ी पहल; डिजीलॉकर से जुड़ा 'संपन्न' पोर्टल, पेंशनरों को होगी सुविधा

नई दिल्ली, 21 जनवरी (आईएएनएस)। सरकार ने बुधवार को बताया कि ‘संपन्न’ पेंशन पोर्टल को अब डिजीलॉकर से जोड़ दिया गया है। इससे पेंशनरों को पेंशन पेमेंट ऑर्डर (ई-पीपीओ), ग्रेच्युटी ग्रेच्युटी ऑर्डर्स और अन्य जरूरी दस्तावेज कभी भी और कहीं से ऑनलाइन मिल सकेंगे।
यह ‘संपन्न’ पेंशन पोर्टल कंट्रोलर जनरल ऑफ कम्युनिकेशन अकाउंट्स के कार्यालय द्वारा विकसित किया गया है। ‘डिजिटल इंडिया’ कार्यक्रम के तहत दूरसंचार विभाग के सभी पेंशनरों को इस सफल इंटीग्रेशन की जानकारी दे दी गई है।
‘संपन्न’ के यूजर्स हर सर्विस कैटेगरी में अपना पीपीओ नंबर डालकर ‘गेट डॉक्यूमेंट’ पर क्लिक कर सकते हैं।
इसके बाद सिस्टम अपने आप यूजर्स की मांग के अनुरूप पेंशन सर्टिफिकेट, ग्रेच्युटी पेमेंट ऑर्डर, कम्यूटेशन पेमेंट ऑर्डर या फॉर्म-16 तैयार कर देगा।
संचार मंत्रालय के अनुसार, इस इंटीग्रेशन से पेंशनर कम्युनिकेशन स्वीकृति आदेश और फॉर्म-16 जैसे अहम दस्तावेज सीधे अपने डिजीलॉकर अकाउंट में प्राप्त कर सकेंगे।
सरकार ने कहा कि यह सुविधा स्मार्टफोन या कंप्यूटर से कभी भी और कहीं भी इस्तेमाल की जा सकती है। इससे दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे, कागज की जरूरत खत्म होगी और बैंकिंग या मेडिकल रिइंबर्समेंट जैसे जरूरी काम आसान हो जाएंगे।
दिल्ली के प्रधान संचार लेखा नियंत्रक आशीष जोशी ने कहा कि इस पहल से कागजी दस्तावेजों की जरूरत खत्म होगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर और अन्य जगहों के पेंशनरों का समय और पैसा बचेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम पेंशनरों को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाता है और सरकार के पेपरलेस डिजिटल गवर्नेंस के लक्ष्य के अनुरूप है।
पेंशनर इस सेवा को इस्तेमाल करने के लिए डिजीलॉकर.गव.इन पर आधार के जरिए लॉगिन कर सकते हैं, अपना पीपीओ नंबर लिंक कर सकते हैं और जरूरी दस्तावेज तुरंत डाउनलोड कर सकते हैं।
29 दिसंबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देश को समर्पित किया गया ‘संपन्न’ पोर्टल, प्रशासन को सिस्टम-केंद्रित से पेंशनर-केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों और उनके परिवारों को दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते।
इस पोर्टल के जरिए पेंशन की पूरी प्रक्रिया – आवेदन से लेकर प्रोसेसिंग, ई-पेंशन पेमेंट ऑर्डर जारी करना, भुगतान, लेखा-जोखा, ऑडिट और शिकायत निवारण तक डिजिटल कर दी गई है।
–आईएएनएस
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