नोएडा इंजीनियर की मौत: कमिश्नर, एडीजी और चीफ इंजीनियर करेंगे जांच की निगरानी, सीएम कर सकते हैं दौरा

नोएडा, 19 जनवरी (आईएएनएस)। नोएडा के सेक्टर-150 में हुए दर्दनाक हादसे को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। एक युवा इंजीनियर की पानी से भरे गड्ढे में कार गिरने के बाद डूबकर हुई मौत के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं संज्ञान लेते हुए बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है।
मुख्यमंत्री की सख्ती के बाद नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) लोकेश एम को उनके पद से हटा दिया गया है। यह घटना नोएडा के सेक्टर-150 क्षेत्र में उस समय हुई जब देर रात एक युवा इंजीनियर की कार सड़क पर बने पानी भरे गहरे गड्ढे में जा गिरी। भारी जलभराव और अंधेरे के कारण कार चालक को गड्ढे का अंदाजा नहीं लग सका, जिससे वाहन सीधे पानी में समा गया। हादसे में इंजीनियर की डूबने से मौत हो गई।
घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों में भारी आक्रोश देखने को मिला। लोगों ने प्राधिकरण पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए और कहा कि लंबे समय से इस इलाके में जलभराव, खुले गड्ढों और सुरक्षा इंतजामों की कमी की शिकायतें की जा रही थीं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए। सीएम के आदेश पर इस पूरे प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है।
यह एसआईटी एडीजी जोन मेरठ के नेतृत्व में काम करेगी। टीम में एडीजी जोन मेरठ के अलावा मंडलायुक्त मेरठ और लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता को भी शामिल किया गया है। एसआईटी को पांच दिनों के भीतर जांच पूरी कर अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी देखा जाएगा कि संबंधित सड़क और क्षेत्र की देखरेख किस विभाग के अधीन थी, जलभराव और गड्ढों की जानकारी होने के बावजूद समय पर सुधारात्मक कदम क्यों नहीं उठाए गए, और किन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।
दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। इस बीच, यह भी माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं घटनास्थल का दौरा कर सकते हैं। संभावित दौरे के दौरान मुख्यमंत्री पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दे सकते हैं और हर संभव सहायता का आश्वासन दे सकते हैं। नोएडा सेक्टर-150 की यह घटना प्रदेश में शहरी विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
–आईएएनएस
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