नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते को लेकर किया जा रहा दावा गुमराह करने वाला: पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग


कोलकाता, 19 जनवरी (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग की तरफ से कहा गया है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए तलब किए जाने का दावा गुमराह करने वाला है।

सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में यूजर की तरफ से दावा किया गया था कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पोते चंद्र कुमार बोस को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर सुनवाई के लिए तलब किया गया।

इसमें आगे लिखा था कि यह एसआईआर सुनवाई नहीं, बल्कि भाजपा द्वारा प्रायोजित अपमान है। यदि चुनाव आयोग के लिए नेताजी का परिवार ‘पर्याप्त भारतीय’ नहीं है, तो फिर कौन है?

इसके जवाब में पश्चिम बंगाल चुनाव आयोग की तरफ से लिखा गया है कि यह दावा गुमराह करने वाला है। गिनती के फॉर्म में साफ दिखता है कि वोटर ने लिंकेज कॉलम खाली छोड़ दिए हैं, इसलिए चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन के मुताबिक, उन्हें दूसरे सभी वैसे ही वोटरों के साथ सुनवाई के लिए बुलाया गया है।

इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) पर राज्य में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से जानबूझकर अल्पसंख्यक मतदाताओं को निशाना बनाकर उनके नाम हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि अल्पसंख्यक बहुल मालदा जिले में लगभग 90,000 मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।

मुख्यमंत्री का कहना है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की शिकायतें बिल्कुल जायज हैं। इस समुदाय के मतदाताओं को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है। मैंने सुना है कि अकेले मालदा जिले में 90,000 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने पर विचार किया जा रहा है। अल्पसंख्यक समुदाय के मतदाताओं के अलावा, मतुआ, राजवंशी और आदिवासी समुदायों जैसे पिछड़े वर्गों के मतदाताओं को भी निशाना बनाया जा रहा है। वे अमर्त्य सेन और कवि जॉय गोस्वामी जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी नहीं बख्श रहे हैं।

–आईएएनएस

एएमटी/डीकेपी


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