सेना दिवस : थलसेना प्रमुख ने दोहराया सेना का मूल मंत्र 'नाम, नमक और निशान'


नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। सेना दिवस के अवसर पर भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सेना के मूल मंत्र ‘नाम, नमक और निशान’ को दोहराया है। यह भारतीय सेना का एक आदर्श वाक्य है। यह वाक्य देश के प्रति कर्तव्य को पूर्ण समर्पण व निष्ठा के साथ निभाने से जुड़ा है।

अपने संदेश में थलसेना प्रमुख ने कहा कि बीता वर्ष राष्ट्रीय संप्रभुता और हितों की रक्षा के लिए सतत सतर्कता और निर्णायक परिचालनात्मक प्रतिक्रियाओं का साक्षी रहा। इसका उत्कृष्ट उदाहरण ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में देखने को मिला है। इसके साथ ही, भारतीय सेना ने देशभर में तथा मित्रवत पड़ोसी देशों में आई प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता और आपदा राहत अभियानों में प्रभावी भूमिका निभाई है।

सेना प्रमुख के अनुसार, भारतीय सेना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों (यूएनपीके) के माध्यम से वैश्विक शांति में विश्वसनीय योगदान जारी रखा है।

भारतीय थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भारतीय सेना के सभी रैंकों, पूर्व सैनिकों, वीर माताओं, वीर नारियों, रक्षा नागरिक कर्मियों और उनके परिवारजनों को हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कर्तव्य पथ पर अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को नमन करते हुए उनके अदम्य साहस और त्याग को श्रद्धांजलि अर्पित की।

थलसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जॉइंटनेस, आत्मनिर्भरता और नवाचार के दृष्टिकोण की भी बात की। उन्होंने इस दृष्टिकोण के अनुरूप इस वर्ष की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि अन्य सर्विसेस (नौसेना, वायु सेना) और एजेंसियों के साथ तालमेल को सुदृढ़ करना, स्वदेशी रक्षा समाधानों के विकास को प्रोत्साहित करना तथा नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति में एक प्रमुख सक्षमकर्ता की भूमिका निभाएगी, चाहे वह राष्ट्रीय सुरक्षा हो, सामाजिक-आर्थिक प्रगति, आपदा राहत या वर्ष ‘ऑफ रिफॉर्म्स और डिकेड ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन’ के अंतर्गत व्यापक राष्ट्र निर्माण के प्रयास हों। इस दिशा में गति बनाए रखने के लिए वर्ष 2026 और 2027 को नेटवर्किंग और डेटा-केंद्रितता के वर्ष घोषित किया गया है। इसका उद्देश्य भारतीय सेना को एक डेटा-आधारित, नेटवर्क-सक्षम और सभी हितधारकों के साथ पूर्णत एकीकृत बल में रूपांतरित करना है। ऐसा इसलिए ताकि ‘डीआईएमई-टी’ के अंतर्गत ‘मल्टी-डोमेन’ परिवेश में युद्धों में विजय सुनिश्चित की जा सके।

जनरल द्विवेदी ने सेना दिवस के मौके पर वीर माताओं, वीर नारियों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण व सम्मान के प्रति भारतीय सेना की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि उनकी दृढ़ता और त्याग हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने राष्ट्रीय चेतना में सेना की गहरी जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए सभी से राष्ट्र सेवा के प्रति पुन समर्पित होने का आह्वान किया।

अपने संदेश का समापन करते हुए थलसेना प्रमुख ने भारतीय सेना के मूल मंत्र ‘नाम, नमक और निशान’ की भावना के साथ देश सेवा का संकल्प दोहराया।

–आईएएनएस

जीसीबी/डीसीएच


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