बाजार की पाठशाला: आईपीओ क्या होता है, इसमें पैसा लगाने से निवेशकों को कैसे और क्या-क्या फायदा होता है?

मुंबई, 14 जनवरी (आईएएनएस)। आईपीओ यानी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग। आसान शब्दों में कहें तो जब कोई प्राइवेट कंपनी पहली बार आम लोगों से पैसा जुटाने के लिए अपने शेयर बाजार में बेचती है, तो उसे आईपीओ कहा जाता है।
मान लीजिए कोई कंपनी अब तक सिर्फ अपने मालिकों या कुछ चुनिंदा निवेशकों के पैसों से चल रही थी। अब कंपनी को बिजनेस बढ़ाने के लिए ज्यादा पैसे की जरूरत है। ऐसे में वह तय करती है कि वह आम लोगों को भी कंपनी का मालिक बनाएगी। इसके लिए कंपनी अपने कुछ शेयर स्टॉक मार्केट में बेचती है। यही प्रक्रिया आईपीओ कहलाती है।
वहीं, निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने बिजनेस के विस्तार, कर्ज चुकाने या नई योजनाओं में निवेश के लिए करती है। आम निवेशकों के लिए आईपीओ इसलिए खास होता है, क्योंकि इसमें शुरुआती दाम पर कंपनी में हिस्सेदारी लेने का मौका मिलता है।
जानकारों के मुताबिक, आईपीओ में निवेश करने से निवेशकों को कई तरह के फायदे हो सकते हैं, लेकिन इसके साथ जोखिम भी होता है। कई बार कंपनी का शेयर आईपीओ के प्राइस बैंड से ऊंचे भाव पर शेयर बाजार में लिस्ट होता है। अगर आपने आईपीओ में शेयर खरीदे और लिस्टिंग के दिन दाम बढ़ गए, तो आप तुरंत शेयर बेचकर लिस्टिंग गेन कमा सकते हैं।
उदाहरण के तौर पर, यदि किसी कंपनी का आईपीओ 100 रुपए पर आया और शेयर बाजार में 150 रुपए पर लिस्ट हुआ, तो निवेशक को प्रति शेयर 50 रुपए का सीधा लाभ होता है।
अगर आपने किसी अच्छी कंपनी के आईपीओ में निवेश किया और लंबे समय तक शेयर होल्ड किए, तो यह लंबे समय में अच्छा-खासा मुनाफा करा सकता है।
जानकारों का कहना है कि आईपीओ निवेशकों को कम कीमत पर मजबूत और उभरती हुई कंपनी में हिस्सेदारी लेने का मौका भी देता है। कई बार कंपनियां अपने शुरुआती चरण में आकर्षक वैल्यूएशन पर शेयर जारी करती हैं, जिससे शुरुआती निवेशकों को आगे चलकर बड़ा फायदा मिल सकता है। जैसे-जैसे कंपनी का कारोबार बढ़ता है और मुनाफा मजबूत होता है, शेयर की कीमत भी बढ़ती जाती है।
इतना ही नहीं, कुछ कंपनियां अपने मुनाफे का हिस्सा डिविडेंड के रूप में शेयरहोल्डर्स को देती हैं, जिससे निवेशकों को अतिरिक्त और नियमित आय मिल सकती है।
आईपीओ में निवेश करने से निवेशक कंपनी का शेयरहोल्डर बन जाता है, यानी वह कंपनी के मुनाफे और भविष्य की ग्रोथ में भागीदार होता है। शेयरधारक को कंपनी की बैठकों में वोट देने का अधिकार मिलता है और कंपनी की अहम जानकारियां भी समय-समय पर मिलती रहती हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसके साथ ही आईपीओ निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो को विविध बनाने का मौका देता है। अलग-अलग सेक्टर की नई कंपनियों में निवेश करके जोखिम को संतुलित किया जा सकता है। हालांकि, यह भी जरूरी है कि हर आईपीओ में निवेश करना सही नहीं होता। निवेश से पहले कंपनी के बिजनेस मॉडल, वित्तीय स्थिति और भविष्य की योजनाओं को समझना बेहद जरूरी है, तभी आईपीओ से सही और टिकाऊ फायदा उठाया जा सकता है।
–आईएएनएस
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