भारत और इजरायल के संबंधों का इतिहास : कैसे पीएम मोदी के नेतृत्व में मजबूत हुई दोस्ती?

नई दिल्ली, 30 नवंबर (आईएएनएस)। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू दिसंबर में भारत का दौरा करने वाले थे। हालांकि, किसी कारणवश इस यात्रा को फिलहाल के लिए टाल दिया गया है। इजरायली पीएम ऑफिस की ओर से जानकारी दी गई कि नेतन्याहू के भारत दौरे के लिए नई तारीखों पर बातचीत चल रही है।
इस साल तीसरी बार पीएम नेतन्याहू का दौरा टाला गया है। इस बीच इजरायली मीडिया समेत अन्य ने दावा किया कि यह फैसला सुरक्षा की वजह से लिया गया। हालांकि, इजरायली अधिकारियों ने इन सभी अटकलों पर विराम लगा दिया, यह कहते हुए कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की सुरक्षा पर इजरायली प्रधानमंत्री को पूरा भरोसा है और उनकी टीम भारत दौरे को लेकर नई तारीख पर पहले से ही बातचीत कर रही है।
बता दें कि इससे पहले इजरायली पीएम ने 2018 में भारत का दौरा किया था। हालांकि, भारत और इजरायल के बीच के रिश्ते हमेशा से इतने करीब नहीं रहे हैं, जितना मोदी सरकार के नेतृत्व में हुए। ऐसा नहीं है कि दोनों देशों के बीच कोई साझेदारी नहीं थी। दोनों देशों के बीच डिफेंस क्षेत्र में लंबे समय से पार्टनरशिप जारी है।
संयुक्त राष्ट्र संघ में 14 मई 1948 को इजरायल को स्वतंत्र देश बनाने का प्रस्ताव आया था। शुरुआत में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू इसके पक्ष में नहीं थे, लेकिन दो साल में ही 1950 में इजरायल को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी। फिर भी दोनों देशों के बीच 1992 में कूटनीतिक संबंध स्थापित हुए।
भारत फिलिस्तीन का समर्थन करता था। यही कारण है कि उसे इजरायल को मान्यता देने में इतना वक्त लगा। हालांकि, रक्षा के क्षेत्र में भारत और इजरायल के बीच की दोस्ती काफी पुरानी है। इजरायल ने ना केवल 1962 के भारत-चीन युद्ध में मोर्टार और मोर्टार रोधी डिवाइस दिए, बल्कि कारगिल युद्ध में भी इजरायल ने भारत को सैन्य मदद पहुंचाई।
फिर भी दोनों देशों के बीच काफी गहरी खाई थी, जिसे भरने के लिए 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार ने कदम उठाए। नतीजा यह निकला कि इजरायल के तत्कालीन रक्षामंत्री गोपनीय तरीके से भारत दौरे पर पहुंचे। इसके बाद 1985 में तत्कालीन पीएम राजीव गांधी और सिमोन पेरेस की यूएनजीए में मुलाकात हुई।
1992 में फिर तत्कालीन पीएम नरसिम्हा राव के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंध स्थापित हुए। 2000 में तत्कालीन गृह मंत्री लाल कृष्ण आडवाणी ने भारत की तरफ से पहली उच्च स्तरीय आधिकारिक इजरायल यात्रा की। इसके बाद 2003 में पहली बार भारत के तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह इजरायल पहुंचे थे। 2003 में ही इजरायल के तत्कालीन पीएम एरियल शेरोन ने भारत का दौरा किया था।
भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी 2015 में इजरायल गए। इस समय तक भारत के किसी भी प्रधानमंत्री ने इजरायल का दौरा नहीं किया था। पहली बार भारत के पीएम के तौर पर नरेंद्र मोदी ने इजरायल का दौरा किया।
1950 में इसे स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने के बाद पहली बार 2017 में भारत के प्रधानमंत्री ने इजरायल का दौरा किया। पीएम मोदी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध में काफी मजबूती आई है।
भारत और इजरायल रक्षा, कृषि, तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में अहम साझेदार हैं। 2020 से लेकर 2024 तक दोनों देशों के बीच रक्षा क्षेत्र में कई बड़ी साझेदारियां हुई हैं। दोनों देश सांस्कृतिक तरीके से भी आपस में जुड़े हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि भारत में यहूदियों का आगमन लगभग दो हजार साल पहले हुआ था।
भारत और इजरायल के बीच वर्तमान समय में विश्वास और गहरा हुआ है। भारत आज भी फिलिस्तीन का समर्थन करता है, लेकिन दूसरी तरफ आतंकवाद के खिलाफ इजरायल की लड़ाई में डटकर खड़ा है। इजरायल भी आतंकवाद के खिलाफ भारत का समर्थन करता रहा है।
–आईएएनएस
केके/एबीएम