गोवा पुलिस: इस साल स्कैम से जुड़े 767 नंबर ब्लॉक किए, 660 फ्रॉड वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म हटाए


पणजी, 29 नवंबर (आईएएनएस)। गोवा साइबर क्राइम पुलिस ने गलत इरादे वाले सोशल मीडिया अकाउंट पर लगातार कार्रवाई करते हुए इस साल टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स के साथ मिलकर 660 धोखाधड़ी वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म को हटाने का अनुरोध किया और 767 स्कैम से जुड़े मोबाइल नंबर सफलतापूर्वक ब्लॉक किए।

शनिवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस कार्रवाई में 507 फर्जी वेबसाइट, 151 गलत इरादे वाले सोशल मीडिया अकाउंट और दो मोबाइल एप्लिकेशन हटाना शामिल था।

एसपी (साइबर क्राइम) ने पुष्टि की कि गोवा पुलिस क्रिमिनल नेटवर्क को एक्टिव रूप से रोकने और राज्य के निवासियों, टूरिस्ट और बिजनेस ऑपरेशन के लिए डिजिटल सेफ्टी की गारंटी देने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

एसपी ने कहा, “यह लगातार चलने वाला कैंपेन ‘डिजिटल अरेस्ट’ स्कैम और ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड को कम करने के लिए बहुत जरूरी है, जो हमारी आबादी को टारगेट करते हैं।” जिन प्लेटफॉर्म को टेकडाउन रिक्वेस्ट के लिए टारगेट किया गया था, वे मुख्य रूप से कई तरह के स्कैम में शामिल थे, जिसमें नकली पार्सल डिलीवरी नेटवर्क, ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट फ्रॉड, डेटिंग एप्लिकेशन के जरिए चलने वाले सेक्सटॉर्शन रैकेट और पुलिस और कस्टम जैसे सरकारी अधिकारियों की नकल करने वाली स्कीम शामिल हैं। इसके अलावा, नकली होटल बुकिंग पोर्टल, जो अक्सर टूरिस्ट को शिकार बनाते हैं, उन्हें भी निष्क्रिय कर दिया गया।

सबसे ज्यादा वेबसाइट मई 2025 में हटाए गए, जिसमें 258 वेबसाइट शामिल थीं, इसके बाद जनवरी (78) और जून (72) में कार्रवाई हुई।

एक्टिव फाइनेंशियल फ्रॉड के लिए तुरंत हेल्पलाइन 1930 है, या आधिकारिक साइट पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है, ऐसा कहा गया है।

गोवा पुलिस ने 1930 हेल्पलाइन के जरिए भारत में पहली बार 100 प्रतिशत साइबर फ्रॉड रिस्पॉन्स रेट हासिल किया, 5,000 से ज्यादा कॉल हैंडल किए और जल्दी फंड रिकवरी में मदद की।

फरवरी के आखिर तक के पुलिस डेटा के मुताबिक, गोवा में इस साल अब तक 6,000 से ज्यादा साइबर फ्रॉड के मामले सामने आए हैं, जिसमें फ्रॉड करने वालों ने पीड़ितों से 149 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम उड़ा ली है। ऑफिशियल नुकसान लगभग 100 करोड़ रुपए है, हालांकि इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे बढ़ते स्कैम के बीच कम रिपोर्टिंग से पता चलता है कि आंकड़े ज्यादा हैं।

–आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी


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